वाराणसी. विश्व प्रसिद्ध काशी की गंगा आरती शुक्रवार, गुरुपूर्णिमा को दिन में ही संपन्न हो गई। ऐसा 104 साल बाद रात में लगने वाले सदी के सबसे लंबे खग्रास चंद्र ग्रहण के कारण हुआ है। इतना ही नहीं चंद्र ग्रहण से नौ घंटा पहले लगे सूतक के चलते मंदिरों के पट भी बंद हो गए। अब मोक्ष काल के बाद शनिवार की सुबह मंगला आरती के बाद ही मंदिरों के पट खुलेंगे।
रात 11.45 बजे लगेगा ग्रहण
बता दें कि गुरु पूर्णिमा पर शुक्रवार की रात्रि 11.54 बजे लगेगा सदी सबसे लम्बा चन्द्रग्रहण। इसका सूतक नौ घंटे पूर्व दोपहर 2.47 पर लग गया। ऐसे में हिंदू मान्यताओं के अनुसार ग्रहण से पूर्व सूतक काल लग जाने के बाद किसी तरह का पूझा-पाठ नहीं किया जाता। ऐसे में गंगा आरती भी पहले ही संपन्न करा दी गई। इसके तहत दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा होने वाली दैनिक संध्या गंगा आरती का समय बदल दिया गया। सूतक लगने से पूर्व दोपहर में 1.30 बजे ही मां गंगा की आरती हुई। 26 वर्षों के इतिहास में यह दूसरी बार है जब मां गंगा की आरती संध्या की बजाए दोपहर में हो रही है। इससे पूर्व बीते वर्ष 7 अगस्त को दिन में आरती की गई थी। इस बाबत संस्था के अध्यक्ष शुशांत मिश्रा ने बताया कि हिन्दू मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण लगने से 9 घण्टे पूर्व सूतक काल लग जाता है। सूतक लग जाने के बाद पूजा-पाठ करने का विधान नहीं है। ऐसे में मां गंगा की आरती दोपहर में ही की गई।
संकट मोचन का कपाट बंद, बाबा विश्वनाथ, अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन जारी
ग्रहण पूर्व लगने वाले सूतक के चलते परम्परागत रूप से सबसे पहले संकटमोचन मंदिर का कपाट दोपहर 12 बजे भोग आरती के बाद बंद कर दिया गया। अब मंदिर शनिवार की सुबह 4.30 बजे खुलेगा। उधर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विशाल सिंह ने बताया कि बाबा का मंदिर ग्रहण के स्पर्श काल तक खुला रहेगा। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सूतक काल में भी दर्शन-पूजन अनवरत जारी रहता है। अन्नपूर्णा मंदिर के प्रबंधक काशी मिश्र ने बताया कि माता के दरबार में अभी दर्शन-पूजन जारी है, रात 10 बजे शयन आरती के बाद कपाट बंद होगा।