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नवरात्र के छठे दिन करें देवी कात्यायनी के दर्शन-पूजन, काशी में यहां विराजती हैं मां

धर्म की नगरी काशी में 9 देवियों के मंदिर स्थपित हैं। नवरात्रि की षष्ठी तिथि को माता कात्यायनी देवी के दर्शन-पूजन का विधान है। इनका मंदिर सिंधिया घाट पर स्थिति है।

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Worship Goddess Katyayani on the sixth day of Navratri

Navaratri 2023

वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में शारदीय नवरात्र की धूम है। नवरात्र की षष्ठी तिथि को देवी कात्यायनी के दर्शन का विधान है। इनका अति प्राचीन मंदिर सिंधिया घाट पर स्थित है। मान्यता है कि दुर्गा षष्ठी के दिन माता का दर्शन करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है। नवरात्र के छठे दिन यहां भक्तों का रेला उमड़ा हुआ है। भक्त मंगला आरती के बाद से माता के दर्शन कर निहाल हो रहे हैं।

विवाह बाधा से मिलती है मुक्ति

शारदीय नवरात्रि पर भक्त दर्शन को उमड़ पड़े हैं। देवी मंदिर के पुजारी कुलदीप मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि की षष्ठी तिथि को माता के दर्शन मात्र से कुंवारी कन्याओं की विवाह बाधा दूर हो जाती है और उन्हें मनचाहा वर मिलता है। मान्यता है कि जो कन्या माता को 7 मंगलवार दही-हल्दी लगाती है उसकी विवाह बाधा अवश्य ही दूर हो जाती है।

काशी के अलावा वृन्दावन में मां का है निवास

पुजारी ने बताया कि मां पापों का नाश करती हैं। मां का यह रूप आत्मज्ञान प्रदान करता है। मां का भव्य मंदिर काशी के अलावा वृन्दावन में स्थित है। माना जाता है कि भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने कात्यायनी व्रत रखा था।


मां कात्यायनी को पसंद है शहद

मां कात्यायनी ने देवताओं की प्रार्थना सुनकर महिषासुर से युद्ध किया। महिसासुर से युद्ध करते हुए मां जब थक गई तब उन्होंने शहद युक्त पान खाया। शहद युक्त पान खाने से मां कात्यायनी की थकान दूर हो गयी और महिषासुर का वध कर दिया। कात्यायनी की साधना एवं भक्ति करने वालों को मां की प्रसन्नता के लिए शहद युक्त पान अर्पित करते हैं।

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