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सावन का पहला सोमवार- … तो अबकी टूट जाएगी 86 साल पुरानी बाबा विश्वनाथ को जलाभिषेक की परंपरा!

परंपरागत रूप से सावन के पहले सोमवार को यदुवंशी करते हैं बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेकअबकी मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह में प्रवेश कर दिया है प्रतिबंधितयादव समाज है उद्वेलितचंद्रवंशी यादव समाज ने कहा है हम न खुद कोई परंपरा शुरू करेंगे न होने देंगे

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सावन के पहले सोमवार को बाबा विश्वनाथ का जलाभिेषक करने जाते यदुवंशी (फाइल फोटो)

सावन के पहले सोमवार को बाबा विश्वनाथ का जलाभिेषक करने जाते यदुवंशी (फाइल फोटो)

वाराणसी. दो दिन बाद शुरू हो रहा है भगवान शिव को प्रिय श्रावण मास। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में पुरातन परंपरा के अंतर्गत हर सोमवार को बाबा को जलाभिषेक की अलग-अलग व्यस्था है। इसके तहत सावन के पहले सोमवार को यदुवंशी समाज के लोग 86 साल से जलाभिषेक करते आ रहे हैं। इसी तरह एक सोमवार को क्षेत्र के व्यापारियों के लिए निश्चित है। लेकिन इस बार मंदिर प्रशासन ने बाबा के गर्भगृह में किसी श्रद्धालु को न जाने देने का फैसला किया है। इसे लेकर यदुवंशी समाज के लोगों में काफी गुस्सा है। उनका साफ कहना है कि हम परंपरागत रूप से जलाभिषेक करेंगे। इस बाबत उन्होंने मंदिर प्रशासन को नोटिस भी दे दिया है। लेकिन अभी तक प्रशासन भी अपनी व्यवस्था पर अड़ा है।

बता दें कि विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन ने सावन में जुड़ने वाली भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने और सभी श्रद्धालुओं को दर्शनलाभ देने का कारण बताते हुए भक्तो के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगा दी है। उधर परंपरागत रूप से सावन के पहले सोमावर को काशी का यादव समाज बाबा का जलाभिषेक करता आ रहा है। ऐसे में चंद्रवंशी गोप सेवा समिति ने बैठक कर तय किया कि यदुवंशी समाज अपनी परंपराओं से पीछे नहीं हटेगा। उन्होने यह भी मांग की है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद यदुवंशियों को ललिता घाट जाने और वहां से लौट कर शृंगार गौरी तक आने के लिए मंदिर प्रबंधन मार्ग उपलब्ध कराए। यादव समाज के लोगों ने कहा कि यह जिला प्रशासन और विश्वनाथ मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह परंपराओं के निर्वहन में हमारा सहयोग करें।

मेलू सरदार की अध्यक्षता में हुई बैठक में लालजी यादव, विनय यादव, बल्ली सरदार, दुर्गा सरदार, गोपाल यादव , रितेश यादव, सुमित यादव, सोमनाथ यादव, विनोद यादव, शुभम यादव,दीपक यादव, राहुल यादव, रजत यादव, सतीश यादव प्रमुख रूप से शामिल थे। .

सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक की ये है परंपरा
ऐसे होती है जलाभिषेक यात्रा: यात्रा केदारघाट पर जल लेकर गौरीकेदारेश्वर और तिलभांडेश्वर के अभिषेक से शुरू होती है। मानमंदिर घाट से जल लेकर दलवेश्वर महादेव का अभिषेक करते हुए डेढ़सीपुल के पारंपरिक मार्ग से विश्वनाथ मंदिर जाते हैं। यहां से निकल कर ललिता घाट से जल लेकर पुन: विश्राम के लिए ज्ञानवापी स्थित शृंगार गौरी आते हैं। बचा हुआ जल महामृत्युंज को अर्पित कर पुन:जल लेने गायघाट जाते हैं। वहां से उठाया हुआ जल त्रिलोचन महादेव, ओंकालेश्वर महादेव, लाट भैरव और सारनाथ स्थित सारंगनाथ महादेव को चढ़ा कर यात्रा पूरी करते हैं।.

86 साल पुरानी है परम्परा

समिति के मदन लाल यदुवंशी बताते हैं कि 1932 में बारिश नहीं होने के कारण बनारस में सूखे से स्थिति खराब हो गई थी, सभी तालाब और जलाशय सूख गए थे। तब सावन के पहले सोमवार को यादव बंधुओं ने बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक किया था और उस दिन शहर में घंटों बारिश हुई तभी से ये परम्परा चली आ रही है।