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15 माह के बच्चे ने पहली बार मुंह से खाया खाना, परिजनों के छलके आंसू
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15 माह के बच्चे ने पहली बार मुंह से खाया खाना, परिजनों के छलके आंसू

अन्न नली बिना जन्मे बच्चे को अब तक गले में छेद कर दिया जा रहा था भोजन -सिविल अस्पताल में की गई जटिल गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी

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Ahmedabad: 15 माह के बच्चे को पहली बार मुंह से भोजन करते देख परिजन भावुक हो गए। जन्म से ही ट्यूब के सहारे भोजन लेने को मजबूर इस बच्चे के चेहरे पर जब पहली बार सामान्य बच्चों जैसी मुस्कान और स्वाद का अहसास दिखा तो मां की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजन गदगद हो गए।अहमदाबाद सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में यह दृश्य देखा गया।

बच्चे की अत्यंत जटिल कही जाने वाली गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी की गई। यह ऐसी खामी है, जिसे ईसॉफेजियल एट्रेशिया कहा जाता है। हर 4000 बच्चों में से किसी एक को यह जन्मजात समस्या होती है। प्राइवेट अस्पतालों में इस सर्जरी का खर्च लगभग 8 लाख रुपये बताया गया था, लेकिन सिविल अस्पताल ने नि:शुल्क उपचार किया गया।अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं बाल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि ईसॉफेजियल एट्रेशिया ऐसी बीमारी होती है, जिसमें जन्म से ही बच्चे को अन्न नली नहीं होती है। जन्म के समय ही गले में छेद कर ट्यूब लगाई गई थी, जिससे भोजन दिया जा रहा था।

महाराष्ट्र निवासी बच्चे के परिवार को किसी निजी अस्पताल में बच्चे के उपचार का खर्च आठ लाख रुपए के आसपास बताया गया था, लेकिन आर्थिक रूप से संपन्न नहीं होने के कारण परिवार ने विकल्प तलाशा और बच्चे को उपचार के लिए अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ले आए।

सिविल अस्पताल में सफल सर्जरी

29 अक्टूबर को पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. राकेश जोशी और एनेस्थीसिया विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नम्रता शाह की टीम ने यह सफल सर्जरी की। इस प्रक्रिया में पेट के भीतरी हिस्से से ही कुछ भाग को अन्ननली का आकार दिया गया। इस प्रक्रिया से बच्चे की अन्न नली बनाई गई और इस जटिल ऑपरेशन के बाद पोस्ट-ऑपरेटिव अवधि बिना किसी जटिलता के बीती और बच्चे ने जीवन में पहली बार मुंह से खाना शुरू किया।

यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत में उल्लेखनीय है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी आशा की किरण है, जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। यही कारण है कि गुजरात ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों से भी लोग यहां उपचार के लिए आते हैं।