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दो दिन में चार बच्चों की श्वासनली व फेफड़ों में फंसे खाद्य पदार्थ को निकाला
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दो दिन में चार बच्चों की श्वासनली व फेफड़ों में फंसे खाद्य पदार्थ को निकाला

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में चारों ही बच्चों की करनी पड़ी ब्रॉन्कोस्कोपी, चिकित्सकों ने अभिभावकों को चेताया

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Ahmedabad शहर के सिविल अस्पताल में मात्र दो दिनों में चार छोटे बच्चों की श्वासनली व फेफड़े में खाद्य पदार्थ फंस जाने के गंभीर मामले सामने आए हैं। इन चारों बच्चों को गंभीर स्थिति में लाने पर ब्रॉन्कोस्कोपी कर बाहरी वस्तुओं को निकालना पड़ा। इन बाहरी वस्तुओं में फलों के बीज, मूंगफली व चने के दाने शामिल हैं। ऐसे केसों के प्रति अभिभावकों को सतर्क रहने की चिकित्सकों ने चेतावनी दी है।यदि बच्चे को अचानक सांस लेने में कठिनाई हो, खासकर भोजन करते समय, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत बच्चों को अस्पताल ले जाएं। हालांकि ब्रॉन्कोस्कोपी के बाद चारों बच्चे की स्थिति बेहतर हो गई है।

सिविल अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष व अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने कहा कि चार अलग-अलग जिलों से आए बच्चों की श्वासनली में मूंगफली, चना और फलों के बीज फंस गए थे। इनमें सुरेंद्रनगर के दो वर्षीय बच्चे की सांसनली में मूंगफली का दाना फंसा था। पाटण निवासी एक वर्षीय बच्चे की सांसनली में अनार का बीज फंस गया जिससे सांस लेने की प्रकिया ज्यादातर बंद जैसी स्थिति में पहुंच गई थी। जबकि 10 वर्षीय एक बालिका के सांस नली में सीताफल का बीज और गोधरा निवासी 14 माह की बच्ची की श्वासनली में होते हुए चने का दान फेफड़े तक पहुंच गया। इन चारों ही बच्चों की हालत खराब होने पर उन्हें सिविल अस्पताल लाया गया।अस्पताल के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉक्टरों की टीम और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने मिलकर ब्रॉन्कोस्कोपी कर सफलतापूर्वक फंसे हुए पदार्थ को बाहर निकाला। इससे चारों बच्चों की जान बच गई।

बच्चों के खानपान के दौरान रखें नजर

डॉ. जोशी ने कहा कि अक्सर छोटे बच्चे बड़ों के साथ खाना खाने का प्रयास करते हैं। ऐसे में अनजाने में दाने या बीज निगल लेते हैं, जो श्वासनली में फंस जाते हैं। ऐसे मामलों में यदि समय पर अस्पताल न पहुंचे तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों पर निगरानी रखने को कहा है।