Ahmedabad. सिटी साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने एक सप्ताह में डिजिटल अरेस्ट ठगी के दूसरे मामले को विफल कर दिया। ऐसा कर बुजुर्ग के 1.43 करोड़ रुपए बचा लिए। इससे पहले मणिनगर की एक बुजुर्ग महिला के 35 लाख बचाए थे।
साइबर क्राइम ब्रांच के एसीपी हार्दिक मांकडिया ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि 17 दिसंबर को एक निजी म्यूचुअल फंड मैनेजर ने साइबर क्राइम ब्रांच कार्यालय आकर बताया कि शहर के घाटलोडिया में रहने वाले उनके बुजुर्ग ग्राहक ने 93 लाख के म्यूचुअल फंड को तुड़वाया है। बेटे को पढ़ने के लिए विदेश भेजने के नाम पर ऐसा किया, लेकिन वे डरे व सहमे दिख रहे थे। बेटे से पूछा तो उसने विदेश जाने को राशि इकट्ठा करने की बात से इनकार किया। ऐसे में शंका गई कि बुजुर्ग डिजिटल अरेस्ट ठग गिरोह का शिकार हैं।
इस सूचना पर पीएसआई पी ए हीरपरा, कांस्टेबल निलेश कुमार को म्यूचुअल फंड मैनेजर के साथ बुजुर्ग के घर भेजा। घर बंद होने के चलते फोन पर संपर्क किया। पता चला कि बुजुर्ग शहर के अंकुर चार रास्ते के पास बैंक में पैसे ट्रांसफर करने पहुंचे हैं। इसके बाद बैंक मैनेजर से संपर्क कर पैसों के ट्रांसफर प्रक्रिया को रुकवाया।
असली पुलिस को समझाने में लगे 10 घंटे
एसीपी मांकडिया ने बताया कि कंबोडिया में बैठे शातिर डिजिटल अरेस्ट ठग गिरोह ने बुजुर्ग को कहा था कि स्थानीय पुलिस कर्मी व बैंक कर्मी कुछ पूछे तो बताना नहीं, क्योंकि वे भी मिले हुए हैं। ऐसा किया तो पांच साल की सजा होगी वहीं एक करोड़ रुपए पैनल्टी भरनी होगी। साइबर क्राइम ब्रांच की टीम और बैंक कर्मी को बुजुर्ग को समझाने में 10 घंटे लग गए। मांकडिया ने बताया कि बुजुर्ग के मोबाइल की जांच करने पर डिजिटल अरेस्ट से जुड़े दस्तावेज मिले। पता चला कि बीते छह दिनों से वह डिजिटल अरेस्ट चल रहे थे। अज्ञात नंबर धारक ने वॉट्सएप पर फोन कर खुद की पहचान मुंबई पुलिसकर्मी के रूप में देते हुए उनसे कहा था कि उनके मोबाइल नंबर का उपयोग आपराधिक गतिविधियों में हुआ है। वैरिफिकेशन के नाम पर फिक्स डिपॉजिट (एफडी), इंश्योरेंस, बैंक में जमा राशि की जानकारी लेते हुए 50 लाख की एफडी तुड़वा दी और 93 लाख के म्यूचुअल फंड भी तुड़वा लिए थे। इस राशि को एक अकाउंट में ट्रांसफर करने को कहा था, ऐसा हो उससे पहले पता चल जाने से राशि बच गई।
शंका होने पर करें साइबर क्राइम ब्रांच का संपर्क
एसीपी मांकडिया ने कहा कि यदि आपका कोई परिचित, मित्र या अन्य व्यक्ति के डिजिटल अरेस्ट होने की शंका हो तो तत्काल साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकृत मोबाइल नंबर 6359625220 या लैंड लाइन नंबर 07922861917 पर भी जानकारी दे सकते हैं।
वृद्धा के रेस्क्यू का वीडियो देख हुए जागरूक
एसीपी के मुताबिक म्यूचुअल फंड मैनेजर ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल 10 दिसंबर को मणिनगर की बैंक से एक बुजुर्ग महिला को रेस्क्यू करने का वीडियो देखा था। महिला के 35 लाख बचाने की खबर से वे डिजिटल अरेस्ट गिरोह के बारे में जागरूक हुए थे।