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Ajmer Patrika foundation day: हर कदम पर अजमेर के साथ रहा पत्रिका

यह पत्रिका की ताकत है, जिससे जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों को आमजन के हित में कई सकारात्मक फैसले लेने पड़े।

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अजमेर. राजस्थान पत्रिका ने रफ्ता-रफ्ता 18 साल का सफर पूरा कर लिया। अजमेर के साथ पत्रिका हर कदम पर खड़ा रहा। यह पत्रिका की ताकत है, जिससे जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों को आमजन के हित में कई सकारात्मक फैसले लेने पड़े। इस सफर के दौरान पत्रिका ने मजबूती से लोगों की आवाज बुलंद रखी।

1. पीडि़तों की मदद

गंभीर रूप से पीडि़त कमजोर माली हालात के अनेक लोगों की व्यथा को ह्ययूमन स्टोरी प्रकाशित की। इससे पत्रिका ने उन्हें अर्थिक मदद करवाई। बालक पंकज के बोनमेरो प्रत्यारोपण के लिए पूरे 50 लाख रुपए जुटाए गए। इसी प्रकार दोनों किडनी खराब होने से जीवन मृत्यु के बीच झूल रहे अभावग्रस्त राजेश शर्मा की व्यथा का समाचार पत्रिका में प्रकाशित होते ही मदद करने वालों का तांता लग गया।

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2. झील से कब्जे हटाने का अभियान

अपनी खूबसूरती के लिए ख्यात आनासागर झील को अतिक्रमियों के कब्जों से मुक्त कराने के लएि पत्रिका ने अभियान छेड़ा। झील के भराव क्षेत्र में कब्जे हो रहे थे। अभियान का नतीजा यह रहा कि कॉमन कॉज सोसायटी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की। न्यायालय के प्रसंज्ञान लेने के बाद झील के पेटे से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए। अब झील के चारों ओर चौपाटी बनाई जा रही है। इसमें अधिकांश काम पूरा हो गया है। राजस्थान झील संरक्षण समिति के सदस्यों ने भी गत दिनों झील का निरीक्षण किया।

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3. कायालयों में कराया रैम्प का निर्माण

सरकारी कार्यालय में नि:शक्तजन के लिए रैम्प निर्माण का प्रावधान होने के बावजूद रैम्प नहीं होने से निशक्तजन को हो रही तकलीफ पर पत्रिका ने अभियान छेड़ा। खबरों का प्रकाशन होने के बाद जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों की नींद टूटी। सरकारी कार्यालयों में रैम्प का निर्माण हुआ। मदद के लिए सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं भी आगे आई। नि:शक्तजन के लिए अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई।

4. अतिक्रमियों में मच गया हडक़ंप

शहर में धड़ल्ले से हो रहे अवैध निर्माणों का मुद्दा पत्रिका ने जोर-शोर से उठाया। अतिक्रमियों के बीच हडक़ंप मच गया। नगर निर्माणों का बाकायदा सर्वे करवाया, नोटिस जारी किए गए और बड़ी संख्या में निर्माणकर्ताओं के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किए, तब से अवैध निर्माणकर्ताओं में भय बना हुआ है। निगमकर्मी भी अवैध निर्माणकर्ताओं से सांठ-सांठ करने से कतराने लगे हैं।

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5. विजन 2025 तैयार करवाया

जुलाई 2013 में पत्रिका के विजन 2025 अभियान के तहत विधानसभा क्षेत्रवार बैठकों का आयोजन हुआ। इसमें सामुदायिक लीडरों, किसान, बच्चे, युवा, बुजुर्गो, महिलाओं, उद्योगपतियों, जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न वर्गो ने अपने विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख मु²ों और उनकी वर्तमान स्थिति पर चर्चा कर विकास का एक सपना बुना। उनके साथ हुई चर्चा का निचोड़ प्रकाशित किया गया। इन सपनों को साकार करने के प्रयास जारी है।

6. उद्यान के लिए चलाया अभियान

शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर बनवाए गए उद्यानों की दुर्दुशा पर पत्रिका ने हाल ही में अभियान छेड़ा। शहर के उद्यानों की कमी से बच्चों, बुजुर्गो और महिलाओं को होने वाली पीड़ा को अभियान के माध्यम से उजागर किया। नतीजा यह निकला कि प्रशासन ने वर्षो से उजाड़ पड़े उद्यानों की सुध लेना शुरू कर दिया। जिला प्रशासन ने उद्यानों को गोद देने का निर्णय भी किया था।

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7. पुष्कर की गरिमा का रखा ख्याल

करीब दस वर्ष पूर्व तीर्थराज पुष्कर के रेतीले धारों में 31 अक्टूबर 2004 को इजराइल के मेहमानों के स्वागत में पार्टी हुई। जिसमें जिले के आला अधिकारियों की मौजूदगी में शराब, कबाब, शबाब का इस्तेमाल हुआ। पुष्कर की गरिमा को तार-तार करने वाले इस दृष्कृत्य को पत्रिका ने प्रमुखता से उजागर किया। राज्य सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तत्कालीन जिला कलक्टर और पर्यटन विभाग की सहायक निदेशक को यहां से हटा दिया।

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8. चौरसियावास तालाब को किया संरक्षित

शहर के प्रमुख तालाबों में से एक चौरसियावास में पानी की आवक के रास्ते बंद हो चुके थे, तालाब सूखने लगा था। राजस्थान पत्रिका ने इस तालाब की सुध ली, जब शहर में जल संकट गहराया हुआ था। यहां पाल और घाट का निर्माण करवाया गया। सफाई कराई, जॉगर्स लेन बनवाई, पेड़ पौधे लगवाए व बगीचा बनवाया। विकलांगों के लिए रेम्प बनवाए। पत्रिका की इस पहल को सबका सहयोग मिला।

9. सफाई उपकरण घोटाला बेनकाब

नगर निगम में सफाई उपकरणों की खरीद में हुए घोटाले की पत्रिका ने उजागर किया। अगस्त 2011 में पत्रिका ने पड़ताल शुरू की। इसकी भनक लगने पर निगम के अधिकारियों ने फर्म के से लिए गए घटिया तगारी-फावड़े रातों-रात लौटना शुरू कर दिए। जिसे पत्रिका ने रंगे हाथ पकड़ा। यह समाचार प्रकाशित होते ही निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने ट्राम्बे स्टेशन पर छापा मारा, बड़ा घोटाला उजागर हुआ और कार्रवाई हुई।

10. पुलिस कारगुजारी का किया पर्दाफाश

पुलिस ने तस्करों से मिलीभगत कर 10 लाख रुपए की रिश्वत ली थी। पत्रिका ने मामले को उजागर किया। हालांकि स्थानीय पुलिस अधिकारी इसे नकारती रही, लेकिन मामला पुलिस महानिदेशक तक पहुंच गया और मामले की की जांच में पत्रिका की खबर सच साबित हुई। राज्य सरकार ने पुलिस व तस्करों के बीच हुई बातचीत की रिकार्डिंग के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया।

11. संवाद सेतु से जगाई विकास की अलख

पत्रिका ने 18 अप्रेल 2007 को जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक, अधिकारियों व प्रबुद्ध लोगों के साथ संवाद सेतु कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने आह्वान किया कि सभी वर्ग अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें, तभी विकास संभव है। कार्यक्रम में हर वर्ग के लोग शामिल हुए। उन्होंने पेयजल, अतिक्रमण, यातायात सफाई सहित अन्य समस्याओं से निबटने के लिए सुझाव दिए, जिन पर बाद में अमल किया या।

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12. जल संरक्षण के प्रति बढ़ाई जागरुकता

पत्रिका के अमृतम जलम् अभियान में कई स्कूल और संगठन जुड़े। उन्होंने जल संरक्षण के प्रति जागरुकता पैदा करने का संकल्प लिया और पत्रिका टीम के साथ श्रमदान कर अपनी भागीदारी निभाई। इसके तहत तालाब, झील और बावडिय़ा की साफ-सफाई भी की गई। अभियान का असर यह हुआ कि जलस्त्रोतों में जहां पानी की आवक के रास्ते खुले, वहीं बच्चों के साथ बड़ों को भी पानी की महत्ता समझ में आई।

13. पुष्कर मेले को पॉलीथिन मुक्त मनाने की घोषणा

राजस्थान पत्रिका की ओर से शहरवासियों को पॉलीथिन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान से अवगत कराने के लिए अभियान चलाया गया। अभियान पर स्वयंसेवी संगठनों का भी सहयोग मिला। पत्रिका ने जिला प्रशासन से पुष्कर मेला और ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स को पॉलीथिन मुक्त करने का आह्वान किया। इस पर जिला प्रशासन ने पुष्कर मेला को पॉलीथिन मुक्त करने का आह्वान किया।

14. हाड़ारानी बटालियन परिसर में लगाए एक ही दिन में 11 हजार पौधे

पत्रिका के हरियाळो राजस्थान कार्यक्रम के तहत वर्ष 2019 में एक ही दिन में 11 हजार पौधे लगाने का रिकॉर्ड बनाया। नारेली स्थित हाड़ीरानी बटालियन परिसर में पौधे लगाए गए। जबकि जिलेभर में 20 हजार पौधे लगाए गए। अच्छी बारिश होने से पौधे लग भी गए और अब यह स्थान हरा-भरा नजर आने लगा है। इसी प्रकार ब्यावर और किशनगढ़ में भीपौधरोपण किया गया।

15. शहर के 60 हुक्का बार करवाए बंद

पत्रिका की ओर से 2018 में शहर में अवैध रूप से संचालित हुक्का बार के खिलाफ मुहिम चलाई गई। इसके लिए शृंखलाबद्ध समाचार प्रकाशित किए गए। इसके तहत जिला पुलिस की ओर से करीब दो दर्जन हुक्का बार से हुक्के के काम आने वाले उपकरण, उसमें डाले जाने वाले विभिन्न तरह के फ्लेवर को जब्त कर संचलकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। चिकित्सा विभाग की ओर से भी कार्रवाई की गई। इस मुहिम का असर यह रहा कि अजमेर में 60 हुक्का बार सहित पूरे प्रदेश में इन पर रोक लगा दी गई।

16. विधायक के भाई की जमीन कुर्क के आदेश(23 अगस्त 2015)

पुष्कर विधायक सचिव सुरेश रावत के भाई प्रतापसिंह के टे्रक्टर की टक्कर से श्रमिक सलीम खां जख्मी हो गया। घायल को अदालत ने बतौर क्षतिपूर्ति एक लाख 12 हजार रुपए देने के आदेश दिए लेकिन सवा साल बीतने के बाद भी पीडि़त सलीम को मुआवजा नहीं दिया। पत्रिका ने विधायक के भाई पर प्रशासन की मेहरबानी शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। प्रशासन ने विधायक के भाई की भूमि की कुर्की के आदेश जारी करते हुए नोटिस चस्पा कर दिया। विधायक के भाई ने पांच दिन बाद मुआवजा राशि अदालत में जमा करवा दी।

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17. जेल में वसूली के लंगर का खुलासा(17 अगस्त 2017)

अजमेर सेन्ट्रल जेल में बंदियों से वसूले जाने वाले सुविधा शुल्क का खुलासा पत्रिका ने 17 अगस्त 2017 में किया था। उसके बाद से लगातार जेल मुख्यालय से जेल में छानबीन चल रही थी। पत्रिका के खुलासे के बाद ही कुछ पीडि़त भी पुलिस के सामने आए और सिविल लाइन थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाया। सिलसिलेवार खबरों के प्रकाशन के बाद जेल प्रशासन ने 6 सजायाफ्ता बंदियों की जेल बदल दी। हालांकि मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जुलाई में बड़ी कार्रवाई करते हुए जेल अधिकारियों और सजायाफ्ता कैदियों की मिलीभगत से चलाए जा रहे सुविधा शुल्क वसूली के खेल का पर्दाफाश किया।

18. एमडीएस में खुला हिंदी विभाग

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग नहीं होने पर राजस्थान पत्रिका ने वर्ष 2015 में खबर प्रकाशित की। तत्कालीन राज्यपाल कल्याण सिंह ने इस पर संज्ञान लेकर विश्वविद्यालय को हिंदी विभाग खोलने के निर्देश दिए।

19. मनचाहे खर्चे पर प्राचार्य को बदला

इंजीनियरिंग कॉलेज में अनियमितताओं, मनमाने खर्चों की खबर का मुद्दा पत्रिका ने वर्ष 2017 में प्रमुखता से उठाया। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और तकनीकी शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लेते इसकी जांच कराई। कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य को बदला गया।

20. ड्रेस कोड को माना गंभीर

वर्ष 2008-09 में एसपीसी-जीसीए के तत्कालीन प्राचार्य ने महिला व्याख्याताओं के लिए ड्रेस कोड लागू करने का फरमान जारी कर दिया था। पत्रिका ने यह मुद्दा उठाया तो मामला राज्य महिला आयोग और सरकार तक पहुंचा। उच्च शिक्षा विभाग ने तत्कालीन प्राचार्य को एपीओ किया।

21. पत्रिका ने रखी बर्डफेयर की नींव

राजस्थान पत्रिका की ओर से वर्ष 2016 में बर्डफेयर की नींव रखी। हर वर्ष बर्डफेयर का आयोजन किया जा रहा है। इसमें जिला प्रशासन, अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, मदस. विवि का भी सहयोग रहा। पत्रिका की इस पहल पर मदस विवि. ने कोर्स प्रारंभ कर दिया।

22. पत्रिका ने दिया शहर को हमराह

अजमेर में शहरवासियों, बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं बुजुर्गों की सेहत को म²ेनजर ‘हमराह ’ कार्यक्रम का प्रारंभ किया। सुबह 6 बजे से शहर सडक़ पर उतरा, खुली और स्वच्छ हवा में व्यायाम, योगासन, परंपरागत खेल, स्केटिंग, साइकिंिलंग सहित अन्य कार्यक्रमों में भागीदारी निभाई। प्रत्येक रविवार को इस तरह के आयोजन शुरू किए।

23. सनसेट एवं सनराइज पॉइंट

राजस्थान पत्रिका की पहल पर ही अजमेर में पुष्कर घाटी स्थित महाराणा प्रताप स्मारक एवं रीजनल कॉलेज के सामने स्थित चौपाटी पर सनराइज पॉइंट एवं सनसेट के लिए पुरानी चौपाटी जेटी के पास चिह्नित की। प्रशासन की ओर से इन पॉइंट को विकसित करने का आश्वासन दिया है।