
रामगढ़ के नौगांवा में रघुनाथगढ़ के पास, तेलिया बास में एक माह की बच्ची के मौत के मामले में सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने नौगांव थाना इंचार्ज को पद से हटा दिया है। मामले में पूर्व में पांच पुलिसकर्मियों को एपीओ किया जा चुका है। सरकार के इस आदेश के बाद जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से नंगली सर्किल पर रविवार सुबह 10 बजे प्रस्तावित धरना प्रदर्शन को स्थगित कर दिया गया है।
फूल बाग में एआईसीसी के महासचिव जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद यह निर्णय किया गया। जिला अध्यक्ष योगेश मिश्रा ने बताया कि घटना के बाद कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिला था। इसके बाद जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक बार फिर पीड़ित परिवार से कांग्रेस नेताओं ने मुलाकात की।
सिंह ने परिवार को उचित न्याय दिलाने की मांग की थी। साथ ही सरकार से मांग की थी कि दोषी पुलिस अधिकारियों को हटाया जाए और अलवर जिले के अलावा किसी अन्य जिले के एएसपी स्तर के अधिकारी से मामले की जांच कराई जाए। सरकार ने हमारे सभी मांगों को मान लिया है इसलिए धरना प्रदर्शन को स्थगित किया गया है। हालांकि मिश्रा ने चेतावनी दी की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी।
ये है पूरा मामला
नौगांवा थाना इलाके में रघुनाथगढ़ के पास तेलिया का बास में नौगांवा थाना पुलिस ने 2 मार्च को साइबर ठगों को पकड़ने के लिए इमरान के घर में दबिश दी थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि एक पुलिसकर्मी ने चारपाई पर सो रही बच्ची अलिसबा पर पैर रख दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। अलिसबा महज एक महीने की थी। यह भी आरोप है कि पुलिस ने बच्ची का पोस्टमार्टम नहीं करने दिया और खाली कागज पर साइन करवा लिए।
2 मार्च को परिजनों व ग्रामीणों ने एसपी के आवास के बाहर धरना दिया था। शाम को एसपी ने हेड कांस्टेबल जगवीर और गिरधारी तथा कांस्टेबल ऋषि, सुनील और शाहिद को लाइन हाजिर कर दिया था। वहीं लाइन हाजिर किए गए दोनों हेड कांस्टेबल जगवीर और गिरधारी के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया था।
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