अलवर. लोगों को जंगल तक पहुंची आबादी का खतरा उस समय साफ दिखाई दे गया, जब शुक्रवार को बाघिन एसटी-19 का शावक अलवर शहर में जंगल से सटे चेतन एनक्लेव फेज द्वितीय में बने मकानों के पीछे अलवर बफर जोन की दीवार तक पहुंच गया। करीब चार- पांच मिनट दीवार पर चढ़ शावक ने पहले आबादी की टोह ली और फिर मकान पर चढ़े लोगों को अपने जंगल की हद बता वापस जंगल में लौट गया। बाघ के शावक के आबादी क्षेत्र में आने का यह पहला मामला नहीं है, कुछ समय पूर्व भूरासिद्ध मंदिर के पास बने जलाशय में भी उतर कर जा चुका है। वहीं बाला किला व रावण देवरा क्षेत्र में इन शावकों को लोग आसानी से देख चुके हैं।
अलवर शहर के वार्ड संख्या 28 स्थित चेतन एनक्लेव फेज द्वितीय भूरासिद्ध के पास लालडिग्गी को आने वाली नहर के पास सुबह करीब 6 बजे लोगों को बाघ एसटी-19 का शावक चहल कदमी करता दिखा। यह क्षेत्र सरिस्का के अलवर बफर जोन से सटा है। शावक का पिछले काफी समय से इसी जंगल में मूवमेंट रहा है। चेतन एनक्लेव फेज द्वितीय में बने मकानों के पीछे वन विभाग की चारदीवारी है। बाघ सुबह पहले जंगल में चहल कदमी करता दिखा। मकान पर पालतु कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर लोग छत पर पहुंचे तो उन्हें जंगल में बाघ का शावक चहल कदमी करता दिखा। मकान के ऐन पीछे बाघ को देख लोग डर गए और टाइगर रिजर्व सरिस्का के अधिकारियों एवं आसपास के मकान में रहने वाले लोगों को मोबाइल पर बाघ घूमने की सूचना दी।
इससे लोग मकानों की छत पर चढ़कर बाघ को देखने लगे। कुछ समय बाद शावक दीवार पर चढ़ा और चार- पांच मिनट उस पर घूमता रहा। इस दौरान उसने कई बार मकानों की छतों की ओर घूरा भी। बाद में शावक जंगल में वापस लौट गया।
इसी दौरान सरिस्का अलवर बफर जोन के रेंजर शंकरङ्क्षसह शेखावत व वनकर्मी मौके पर पहुंच गए। रेंजर शेखावत ने बताया कि मकान मालिक ने उन्हें शावक के घूमने की सूचना दी, इस पर टीम मौके पर पहुंची। शावक वापस जंगल में लौट गया और उसने किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाई। वनकर्मियों की टीम वहां निगरानी के लिए तैनात की गई है।