
नारायणपुर के मानसरोवर जोहड़े वाले हनुमानजी महाराज के स्थान पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद् शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कथावाचक बालमुकुंद आचार्य ने बारह ज्योतिर्लिंग, नीलकंठ व शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव को मोक्ष का देवता माना जाता है, और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन से पापों का अंत होता है। शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग में माता पार्वती की तपस्या, महर्षि नारद द्वारा विवाह योग बताने और शिव की अनूठी बारात का वर्णन किया गया। विवाह झांकी सजाई गई, जिस पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा की और भक्ति गीत गाए।