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VIDEO: महाविद्यालय में हुआ प्रेमचंद के कथा साहित्य में मानवीय मूल्य पर व्याख्यान

इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता गौरी देवी राजकीय कन्या महाविद्यालय, अलवर के प्रो. अशोक कुमार मीना ने प्रेमचंद के कथा साहित्य के हवाले से तत्कालीन समय एवं समाज के सरोकारों का उल्लेख करते हुए उनमें निहित मानवीय मूल्यों की पड़ताल की।

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राजगढ़ महाविधालय के हिन्दी विभाग परिषद के तत्वावधान में ‘प्रेमचन्द के कथा साहित्य में मानवीय मूल्य विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्राचार्य प्रो. के. एल. मीना की अध्यक्षता में आयोजित इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता गौरी देवी राजकीय कन्या महाविद्यालय, अलवर के प्रो. अशोक कुमार मीना ने प्रेमचंद के कथा साहित्य के हवाले से तत्कालीन समय एवं समाज के सरोकारों का उल्लेख करते हुए उनमें निहित मानवीय मूल्यों की पड़ताल की।

साहित्य और मानवीय मूल्यों को पर्याय बताते हुए प्रेमचंद के ‘सेवासदन’, ‘कर्मभूमि’, ‘गोदान, ‘पूस की रात’, ‘सद्गति, पंच परमेश्वर, ‘ठाकुर का कुआँ आदि का उल्लेख करते हुए इनके यथार्थामुखी आदर्शवाद को विस्तार से रेखांकित किया। इस अवसर पर छात्रा काजल कुमारी शर्मा, प्रो. रतिराम जाटव, प्रो. पी.एम. मीना ने भी प्रेमचंद के साहित्य में मानवीय मूल्यों पर अपने वक्तव्य दिये।

प्राचार्य प्रो. के.एल. मीना ने अध्यक्षीय उद्‌द्योधन में अधिकाधिक साहित्य के पठन-पाठन द्वारा मानवीय मूल्य अर्जित करने की अपील की। हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. देशराज वर्मा ने प्रेमचन्द के कथा साहित्य में नैतिक आग्रहों तथा यथार्थ के समन्वय की बात कही। प्रो. कपिल कुण्डारा ने प्रेमचंद के साहित्य में गांधी और अम्बेडकर के विचारों को रेखांकित किया। इस अवसर पर हिन्दी परिषद की गतिविधियों के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। प्रो. अशोक मीना, प्रो. चिरंजी लाल, प्रो. भगत सिंह, प्रो. संजय बमणावत, प्रो. नजेन्द्र महावर आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. कपिल कुण्डाख ने किया तथा प्रो. पी.एम. मीना ने सभी का आभार व्यक्त किया।

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