अलवर का स्थापना दिवस आज, यानी 25 नवंबर को मनाया जा रहा है। इसी के अंतर्गत जिले भर मे सभी पर्यटक स्थलों पर मनाये जा रहे मत्स्य उत्सव के दौरान भानगढ़ मे आज राजस्थान कल्चर के घेर नृत्य, सहरिया नृत्य, कच्छी घोड़ी नृत्य आदि नृत्यो की कलाकारों ने प्रस्तुति दीं। देशी विदेशी पर्यटकों के साथ स्थानीय कलाकारों ने भी अपनी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। बता दें अलवर को पहले उलवर के नाम से जाना जाता था, लेकिन बाद में अलवर के नाम से जाना जाने लगा। पूर्व महाराजा जयसिंह ने अलवर के नाम को जो पहचान दी वो आज तक कायम है।
ये रहेगा कार्यक्रम
दोपहर 2.30 बजे से सिलीसेढ़ पाल पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, शाम 6.30 जगन्नाथ मंदिर में विशेष संध्या आरती और शाम 7.30 बजे से महल चौक मे सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। अगले दिन 26 नवम्बर को सुबह 7.30 बजे से कंपनी गार्डन में योगा फॉर ऑल का आयोजन आयुर्वेद विभाग की ओर से होगा। सुबह 10 बजे पुराना सूचना केन्द्र में मेहन्दी-पेंटिंग एवं रंगोली प्रतियोगिता (अतुल्य अलवर थीम) पर होगी। दोपहर 3 बजे होपसर्कस से सागर तक शोभायात्रा निकाली जाएगी। शाम 5.30 बजे से सागर पर दीपमाला और शाम 6.30 महल चौक में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उत्सव की आखिरी दिन 27 नवम्बर को सुबह 7.30 बजे कंपनी गार्डन से नगर वन तक साइकिल रैली, सुबह 9.30 बजे कम्पनी गार्डन (पुरजन विहार) में फ्लॉवर शो, सुबह 11 बजे अशोक सर्किल पर फोटो प्रदर्शनी और शाम 6.30 बजे से महल चौक में म्यूजिकल नाइट होगी।
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