
प्रोसेसिंग यूनिट खोले जाने की व्यापारियों ने उठाई मांग
हर साल 3 लाख क्विंटल से अधिक मूंगफली जिंस की आवक
चौमूं. शहर में संचालित कृषि उपज मंड़ी जयपुर जिले की ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर की बड़ी मंडियों में शामिल है। इसमें जयपुर के विभिन्न उपखंडों समेत दर्जनभर से अधिक जिलों के किसान अपनी जिंस खासकर मूंगफली बेचने आते हैं और यहां से हजारों क्विंटल मूंगफली दूसरे राज्यों में व्यापारी भेज रहे हैं। इसकी वजह है कि चौमूं में प्रोसेसिंग यूनिट्स खुल जाएं तो यहां बेरोजगारों को रोजगार, किसानों को जिंस बेचने के लिए उचित प्लेटफार्म और व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है।
जानकारी के अनुसार चौमूं उपखंड में मूंगफली जिले के अलावा बीकानेर, सीकर, नागौर से भी मूंगफली चौमूं मंडी में बिकने के लिए आती है। हर साल का आंकड़ा देखा जाए तो चौमूं कृषि उपज मंडी में 3 लाख क्विंटल से अधिक मूंगफली जिंस की बिक्री होती है, लेकिन प्रदेश सरकार की ओर से मदद नहीं मिलने की वजह से मूंगफली बाहरी प्रदेशों में भेजी जा रही है। यहां प्रोसेसिंग यूनिट खोली जाए तो चौमूं उपखंड सहित तीन चार जिलों के किसानों एवं व्यापारियों को सीधा फायदा होगा। राजस्थान पत्रिका की ओर से चलाए जा रहे अभियान अपनी उपज, अपना उद्योग को लेकर जब मंडी में व्यापारियों के साथ टॉक शो का कार्यक्रम किया गया तो यह पीडा उभर कर सामने आई।
उल्लेखनीय है कि जिले के जालसू कृषि विस्तार परिक्षेत्र में पिछले साल 2024 के सीजन में जयपुर में 140 हैक्टेयर, कालवाड़ में 1 हजार 730 हैक्टेयर, आमेर में 1 हजार 638 हैक्टेयर और चौमूं परिक्षेत्र में 4 हजार 449 हैक्टेयर में मूंगफली जिंस की पैदावार है। एक हैक्टेयर में औसतन 15 क्विंटल उत्पादन होता है। मंडी में सीकर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, जालौर, जैसलमेर, बाडमेर तक के किसान भी मूंगफली बेचने आते है। हर साल तीन से चार लाख क्विंटल मूंगफली की आवक होती है, जो यहां से बाहर भेजी जाती है। (कासं.)
किसानों को अधिक मिलेंगे दाम
नवीन अनाज मंडी व्यापार मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट की कमी है। यदि सरकार की ओर प्रोत्साहन दिया जाकर स्थानीय स्तर यूनिट लगाए जाए तो व्यापारियों के साथ किसानों को सीधा फायदा होगा। चौमूं के अलावा जयपुर जिले में कहीं पर भी प्रोसेसिंग का एक भी प्लांट नहीं है। ऐसे में मूंगफली बाहर जाती है। बाहर भेजने से व्यापारियों को अतिरिक्त खर्चा आता है। व्यापारी कल्याणसहाय गढ़वाल, अशोक थावरिया, उमेश अग्रवाल, नवीन अग्रवाल, जगदीश गोरा का कहना था कि अगर प्लांट चौमूं इलाके में लगाया जाए तो मूंगफली का भाव बढिया मिल सकेगा। इससे किसानों को अधिक दाम मिल सकेंगे। इससे किसान मूंगफली की पैदावार भी बढाएंगे।
तेल निकालने का भी प्लांट नहीं
मंत्री राकेश खंडेलवाल, कोषाध्यक्ष मुकेश चौधरी ने बताया कि यहां चौमूं मंडी से निवाई और दौसा जिला में तेल निकालने के प्लांट में भी मूंगफली जिंस जाती है। यहां जिले में तेल निकालने का भी प्लांट नहीं है। व्यापारी लक्ष्मणराम जाट, नरेश तांबी, ब्रजमोहन अग्रवाल, रामप्रकाश तांबी, रामेश्वर लाल जाट ने कहा कि सरकार की ओर से मदद मिले तो चौमूं में तेल प्लांट सहित मूंगफली दानों से बनने वाले विभिन्न उत्पादों के प्लांट लग जाए तो चौमूं उपखंड में मूंगफली पैदावार को पंख लग सकते हैं।
युवाओं को रोजगार भी मिलेगा
संरक्षक मदनलाल अग्रवाल, व्यापारी राजेंद्र धमोड़, विष्णु खटोड़ ने बताया कि यहां स्थानीय स्तर पर प्लांट लगने से किसानों की आय तो बढेगी ही साथ ही युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। यहां मंडी में व्यापारी जिंस को खरीदकर गुजरात, पंजाब, यूपी और जम्मू कश्मीर तक पहुंचा रहे हैं। व्यापारियों ने बताया कि महज 10-15 फीसदी मूंगफली की खपत प्रदेश के कुछेक जिलों एवं स्थानीय स्तर पर खुली फैक्ट्रियों में भी होती है। सरकार की ओर से चौमूं में मूंगफली उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाए तो किसानों को अपनी उपज का वाजिब मूल्य मिले और लोगों को रोजगार के अवसर मिल पाए।