वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने कहा है कि गोली लगने से हाथी अर्जुन की मौत नहीं हुई थी। उसे गोली नहीं मारी गई। ऐसे किसी चोट के निशन नहीं मिले हैं।
मंत्री ने सकलेशपुर में यसलूर रेंज के डब्बालिकट्टे में पत्रकारों से कहा कि पशु चिकित्सकों ने बाहरी पोस्टमार्टम किया। गोली के निशान नहीं मिले हैं। घटना की जांच के लिए सेवानिवृत्त मुख्य वन्यजीव वार्डन की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई है। टीम के सदस्य ऑपरेशन में शामिल सभी लोगों के साथ बातचीत करेंगे और वे 15 दिनों में एक रिपोर्ट सौंपेंगे।
मंत्री ने कहा कि हाथी या किसी अन्य वन्यजीव को पकडऩे के अभियानों में 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के हाथियों के उपयोग को प्रतिबंधित करने के लिए केंद्र सरकार के पास दिशा-निर्देश हैं, लेकिन सेवानिवृत्त हाथियों को शामिल करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था।
मंत्री ने कहा कि एक जंगली हाथी को पकडऩे के अभियान के दौरान अर्जुन की मौत दुखद है। हालांकि, अर्जुन ने अभियान में शामिल कई लोगों की जान बचा ली। विभाग जंगली हाथियों को पकड़ने के दौरान पालन की जाने वाली मानक संचालन प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलावों पर गौर करेगा।