बांसवाड़ा. जिले में गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में पेयजल संकट के हालात बन रहे हैं। ग्रामीणों को काफी दूर से जाकर पानी लाना पड़ रहा है। वहीं ग्रामीणों की मांग पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से टैंकर से किए जा रहे जल परिवहन से लोगों की प्यास बुझ रही है।
गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में पेयजल संकट की िस्थति कुशलगढ़ और छोटी सरवन पंचायत समिति क्षेत्र में अधिक सामने आई है। ग्रामीणों को दैनिक उपयोग सहित पानी के लिए पानी लाने दो-तीन किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है। कुशलगढ़ पंचायत समिति की ग्राम पंचायत बावड़ी निनामा, छोटी सरवा, भंवरदा, बस्सी और बिजोरी बड़ी के गांवों व ढाणियों में पानी की अधिक समस्या है। बावड़ी निनामा पंचायत के गलधर, कालाखेत, आमलीपाड़ा, बावड़ी डिंडोर गांवों व मालफला तथा मुखियाफला, छोटी सरवा सहित खेरियापाड़ा, गांदवन, हवारुंडी, नलवाई, भंवरदा पंचायत के भंवरदा, हल्दूपाड़ा, सुंदरीपाड़ा, भोराज, ओडवा, बस्सी पंचायत के ढोलका नई, कांचला, बस्सी, नाका बस्सी, माल बस्सी, खेड़ली बस्सी, खारचियाबस्सी तथा बिजोरी बड़ी, बिजलपुर और सेमसंगड़ा आदि क्षेत्र में विभाग टैंकर दौ़ड़ा रहा है।
माही का तट बना आसरा
छोटी सरवन क्षेत्र की ग्राम पंचायत बारी और दनाक्षरी में जल संकट के हालात हैं। बारी पंचायत के गांव वाक में टैंकर चलाया जा रहा है, किंतु वह पर्याप्त नहीं है। यहां पेयजल संकट से दो-दो हाथ करने पड़ रहे हैं। विभागीय प्रोजेक्ट में यहां पाइप लाइन बिछी, किंतु पूरा क्षेत्र पहाड़ी है। ऊंचाई वाले हिस्सों में पानी नहीं पहुंचता है। इन हालात में माही बांध का पार्श्व हिस्सा सहारा बना हुआ है, जहां महिलाएं व बच्चे रोजाना पानी लाने और कई महिलाएं तट के किनारे गड्ढ़े से पानी निकालने को मजबूर हैं। दनाक्षरी पंचायत की डिंडोरपाड़ा, दुमखोरी, मोकापाड़ा, महुड़ापाड़ा, रेल पाड़ा, कारियापाड़ा, अंदरू का पाड़ा, खोरापाड़ा और वड़लापाड़ा ढाणियों में ग्रामीण टैंकरों के पानी से हलक तर कर रहे हैं।