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बांसवाड़ा

VIDEO: यहां जिम्मेदार खामोश: 12 किमी नदी एरिये में हजारों टन बजरी का अवैध खनन

माही-चाप नदी में अवैध खनन का खेल, दूसरे दिन बजरी शिफ्ट करने का चला दौर

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बांसवाड़ा गढ़ी.जिले के गढ़ी क्षेत्र में चाप-माही नदी के पेटे में अवैध बजरी खनन जोरों पर है। पिछले लंबे समय से चल रहे इस खेल को लेकर जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे हुए है। जिससे बजरी माफिया बेखौफ है, वहीं आसपास के लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही है। इधर, राजस्थान पत्रिका की ओर से “संगम पर बांटा नदियों का पेटा, रातोंरात बजरी खनन” शीर्षक से खबर प्रकाशित करने के बाद बजरी माफियाओं ने आनन-फानन में स्टॉक की बजरी को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट किया। इसके बावजूद दिनभर जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से किनारा करते रहे।

हजारों टन बजरी निकाल रहे

इधर पत्रिका ने दूसरे दिन भी अवैध बजरी खनन मामले की पड़ताल की। जिसमें चोपासाग से भी बड़े खनन एरिया होने की जानकारी सामने आई। खरवेड़ा-बिलोदा के पास माही नदी में भी अवैध बजरी खनन का खेल जोरों पर चल रहा है। यहां से भी बजरी माफिया दिन-रात हजारों टन बजरी निकाल रहे हैं। सेटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीरों में बजरी खनन की हकीकत सामने आ रही है।

उल्लेखनीय है कि चोपासाग के बाद परसोलिया, खरवेड़ा, बिलोदा, कुवालिया, भरकड़िया पाड़ा, मोटी बस्सी आदि कई गांव नदी के किनारे हैं। ़यहां भी रोजाना जेसीबी मशीन द्वारा बजरी निकाली जा रही है। करीब 12 किमी तक पूरे नदी एरिया में 50 जेसीबी मशीन ़़़व करीब 200 ट्रैक्टर द्वारा बजरी खनन का कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है।

नदी में बनाए रास्ते

बजरी खनन के लिए नदी में कई लंबे रास्ते बनाए हुए हैं। इतना ही नहीं प्रशासन के पहुंचने से पहले वहां से दूसरे रास्तों से निकलने का भी इंतजाम कर रखा है। जिससे किसी के भी नदी तक पहुंचने से पहले ही वहां से दूसरे रास्ते होते हुए निकल जाते हैं। कई वषोZं से चल रहे इस कारोबार पर अंकुश के मामले में पुलिस, खनन आदि विभाग महज रस्म अदायगी ही कर रहे है। जिससे कई सवाल खड़े हो रहे है।