बांसवाड़ा. सरकार जहां एक ओर मितव्ययता अपनाने के लिए बिजली बचाओ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं शहर में विभिन्न सरकारी विभागों में अंधेरगर्दी हावी है। रविवार को सरकारी दफ्तरों में छुट्टी के चलते सन्नाटा भले ही पसरा रहा, लेकिन इनके अहाते टयूबलाइटों और बल्ब से रोशन रहे, यही नहीं, कुछ कार्यालयों में तो शनिवार को ताला लगाते वक्त चालू छोड़ दिए गए पंखे दूसरे दिन शाम तक भी चलते दिखे। दोपहर बाद देखे गए इन हालात में कर्मचारी तो दूर, कोई चौकीदार तक नहीं दिखा। ऐसे में चाह कर भी बिजली की इस फिजूलखर्ची को कोई बंद नहीं करवा पाया। गौरतलब है कि कुछ दफ्तरों में तो शनिवार को भी अवकाश ही था। ऐसे में दूसरे दिन भी बिजली उपकरणों को लेकर कहीं संजीदगी प्रतीत नहीं हुई।
पंचायतीराज में कोई धणी-धोरी नहीं
कलक्ट्रेट परिसर में प्रवेश के बाद घाटी पर बायीं ओर बांसवाड़ा पंचायत समिति भवन। 1.10 बजे दफ्तर में कोई नहीं लेकिन ट्यूबलाइटें चालू पाईं गईं।
पुलिस विभाग भी बेफिक्र
पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर। 1.13 बजे यहां अहाते मेंं डीएसपी के कक्ष के बाहर दो टयूबलाइटें चालू पाई गईं। हालांकि बारिश के दिनों में गलियारे में अंधेरे के चलते कार्य दिवस पर लाइटें चालू रखी जाती हैं, लेकिन छुट्टी के दिन फिक्र करने वाला कोई नहीं। इसके अलावा पुलिस अधीक्षक कक्ष के बाहर भी पंखा बेवजह हवा फेंकता दिखा।
पानी का जिम्मा, बिजली से सरोकार नहीं
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग। 1.38 बजे। पुराना बस स्टैंड के पास विभाग के सहायक अभियंता के कक्ष में बल्ब चालू मिला। मानो, विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों का पानी को लेकर ही जिम्मा है, बिजली से इन्हें कोई सरोकार ही नहीं है।