Balotra: Barmer: बालोतरा.लूनी नदी किनारे यह है श्री बांटेश्वर महादेव मंदिर । जन-जन की आस्था का केंद्र। यहां श्रद्धा का सागर हिलोरें लेता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां पूरे साल भक्तों की रौनक रहती है। रोजाना दर्शन के लिए सैकड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। सावन के महीने में यहां मेले सा माहौल रहता है। सावन के पहले सोमवार के मद्देनजर नगर व क्षेत्र के श्रद्धालु अधिक उत्साहित हैं। इस वर्ष हुई अच्छी बारिश व चारों ओर छाई हरियाली के कारण शिव भक्तों का आनंद दुगुना हाे गया है। सोमवार को नगर व क्षेत्र में हजारों श्रद्धालु शिवालय में दर्शन पूजन व अभिषेक कर परिवार में खुशहाली की कामना करेंगे।
शताब्दियों पुराना मंदिर
लोक मान्यता, जन श्रुति व बुजर्गाें के अनुसार वालाजी सिंहा राजपुरोहित ने करीब 750 वर्ष पहले बालोतरा शहर की स्थापना की थी। तत्कालीन समय उनके परिवार के सदस्यों ने मंदिर का निर्माण किया था। यहां पर वर्तमान में जहां मंदिर स्थित है, वह पूर्व में ऊंचा भाग था। टापूनुमा भाग के चारों ओर लूनी नदी बहती थी। ऐसे में ऊंचाई वाले भाग में मंदिर का निर्माण करने व इसके चारों और बहने वाली नदी बंटने पर श्रद्धालुओं ने इसका नामकरण बांटेश्वर महादेव किया। तब ये यह मंदिर बांटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
—इनका कहना है—
बांटेश्वर महादेव मंदिर नगर का प्राचीन मंदिर है। आमजन की आस्था इससे जुड़ी हुई है। मैं प्रतिदिन मंदिर में दर्शन करने जाता हूं।पूरे सावन मास दर्शन पूजन व अभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस मंदिर में दर्शन पूजन करने से मन को बड़ी शांति मिलती है।-मनोहरलाल गोयल,श्रद्धालु।
वालाजी सिंहा राजपुरोहित ने बालोतरा की स्थापना की थी। उनके परिवार जनों ने टापूनुमा भाग पर मंदिर बनवाया था। इसके चारों ओर नदी के पानी का प्रवाह होने व इसके बंटने पर इसका नामकरण बांटेश्वर महादेव किया गया। यहां सावन मास में नियमित अभिषेक होते हैं। इनमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। पूरे साल सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। -गिरधारीलाल सिंहा राजपुरोहित,वंशज,सिंहा राजपुरोहित परिवार ।