
बाड़मेर। शहर के रामनगर स्थित सैन समाज छात्रावास में लंबे समय से पेयजल संकट बना हुआ है। पानी की समस्या से परेशान छात्रों ने मंगलवार को छात्र शहर के महावीर पार्क में एकत्रित हुए। यहां से जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और शीघ्र समाधान की मांग की। छात्रों ने हाथों में सख्तियां लिए हुए चले। छात्रों ने बताया कि नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी के चलते यह परेशानी ओ बढ़ जाती है।
दैनिक व्यवस्थाएं हो रही प्रभावित-
ज्ञापन में छात्रों ने बताया कि पानी की कमी के चलते छात्रावास की दैनिक व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। पेयजल के अभाव में विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। छात्रों का कहना है कि गर्मी के मौसम में समस्या और गंभीर हो गई है। पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने से स्नान, साफ-सफाई तथा अन्य जरूरी कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं।
कोई स्थायी समाधान नहीं
छात्रों ने प्रशासन को बताया कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। कई बार संबंधित विभाग को अवगत करवाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। विद्यार्थियों ने मांग की कि छात्रावास में नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को राहत मिल सके।
नई पाइप लाइन बिछाने, पानी की टंकी बनवाने व बोरवेल की व्यवस्था की मांग
इसके अलावा छात्रों ने नई पाइपलाइन बिछाने, पानी की टंकी बनवाने तथा बोरवेल की व्यवस्था करवाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि स्थायी समाधान के अभाव में हर वर्ष गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गहराने लगता है। छात्रों ने जल निकासी व्यवस्था सुधारने की भी मांग की, ताकि छात्रावास परिसर में साफ-सफाई बनी रहे।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव
विद्यार्थियों ने प्रशासन से संबंधित विभाग को शीघ्र निर्देश जारी कर समस्या का समाधान करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रावास में अध्ययनरत अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और वे यहां रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं तथा अन्य पाठ्यक्रमों की तैयारी करते हैं। ऐसे में मूलभूत सुविधाओं की कमी का सीधा असर उनकी पढ़ाई पर पड़ रहा है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व पार्षद मगराज सैन, रामाराम, दीपक सैन, लूणाराम, महेंद्र, देवाराम, मनोहर, घेवर, प्रकाश और रोहित सैन मौजूद रहे।