Barmer: Wildlife: बाड़मेर जिले के सियागपुरा लीलसर में मिला पैंथर, ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा
रिपोर्ट दौलत शर्मा चौहटन. बीते 15 दिनों से उपखंड के तारातरामठ गांव की पहाड़ियों एवं घनी झाड़ियों में किसी हिंसक जंगली जानवर के आने से चिंतित लोगों ने गुरुवार को राहत की सांस ली। तारातरा क्षेत्र के ग्रामीणों व वन विभाग की टीम की खोजबीन के बाद गुरुवार को लीलसर के सियागपुरा गांव की सरहद में तेंदुए को पकड़ा। दरअसल 15 दिन पहले तारातरा गांव में रात्रि के समय किसी जंगली जानवर के मवेशियों को मारने की घटना होने के बाद लोगों ने खोजबीन शुरू की गई थी। लगातार तीन दिन तक पहाड़ियों व टीलों के बीच जंगली जानवर का पीछा करने के बावजूद वह हत्थे नहीं चढ़ा था। इस पर लोगों ने वन विभाग बाड़मेर व स्थानीय प्रशासन को सूचना देकर हिंसक जानवर को पकड़ने की गुहार लगाई। इस इलाके में करीब एक सप्ताह से वन विभाग और जोधपुर से आई रेस्क्यू टीमें गांव में डेरा डाले हुए थी, गुरुवार को तारातरा की पहाड़ियों से निकलकर लीलसर गांव की तरफ उसका मूवमेंट देखने को मिला। इसके बाद वन विभाग और जोधपुर से आई टीमों ने करीब 10 घंटे लगातार निगरानी करने पर लीलसर के सियागपुरा क्षेत्र में एक पेड़ के नीचे बैठा तेंदुआ नजर आया। रेस्क्यू टीमों ने दस स्थानों पर पिंजरे लगाकर उसके वहां आने की प्रतीक्षा की, करीब 4 बजे निकट स्थिति में पाए जाने पर तेंदुए को ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में डाल दिया गया।
वन विभाग जोधपुर की रेस्क्यू टीम के बंशीलाल सांखला ने बताया कि कड़ी मशकत के बाद लेपर्ड को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब इसे उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अरावली वन क्षेत्र की पहाड़ियों में छोड़ा जाएगा अथवा उनके निर्देश पर आगामी कार्यवाही की जाएगी। तेंदुए को रेस्क्यू ऑपरेशन में तारातरा सहित आस पास के ग्रामीणों ने भरपूर सहयोग किया, अब लोगों ने राहत महसूस की है। ग्रामीण प्रकाश देवासी ने बताया कि 15 दिनों से जंगली जानवर का भय बना हुआ था, करीब 50 से 60 भेड़ बकरियों को शिकार बनाया गया है, आज शाम को तेंदुए को पकड़ने के बाद राहत महसूस की गई।