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त्रिमोही तालाब पर बही श्रम की बूंदें, निखरा सौंदर्य

राजस्थान-पत्रिका के चलाए जा रहे अभियान ‘अमृतं-जलम्’के तहत प्राचीन व ऐतिहासिक त्रिमोही तालाब पर श्रम की बूंदे बहाते हुए उसका सौंदर्य निखारा। लोगों ने तालाब में कंटीली झाड़ियों को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया।

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तालाब खुदाई के साथ कंटीली झाड़ियां हटाई

देश के अंतिम सरहदी गांव त्रिमोही के प्राचीन तालाब पर ग्रामीणों ने राजस्थान-पत्रिका के चलाए जा रहे अभियान ‘अमृतं-जलम्’के तहत प्राचीन व ऐतिहासिक त्रिमोही तालाब पर श्रम की बूंदे बहाते हुए उसका सौंदर्य निखारा। लोगों ने तालाब में कंटीली झाड़ियों को हटाकर स्वच्छता का संदेश दिया। गौरतलब त्रिमोही तालाब भारत-पाक सीमा से सटा हुआ है। आजादी से पहले गडरासिटी पाकिस्तान और त्रिमोही हिंदुस्तान के वाशिंदे यहां से पानी पीते थे।अभी भी गांव में तालाब के पानी का उपयोग लोग कर रहे हैं।

पत्रिका के अ​भियान से प्रेरणा

इस अवसर पर व्यापार मंडल अध्यक्ष सवाईसिंह सोढ़ा ने कहा कि पत्रिका के इस अभियान से हमें प्रेरणा लेते हुए भावी पीढ़ी के लिए परम्परागतजलस्रोतो का सरंक्षण करना होगा। समाजसेवी प्रतापराम भील ने कहा कि जल ही जीवन है। पानी के अत्यधिक दोहन से जल की कमी सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी। इसलिए प्राचीन तालाब, कुएं, बेरियों को बचाना होगा। अगर हम लापरवाह रहे तो आने वाली पीढ़ी को पानी की बूंद- बूंद के लिए तरसना पड़ेगा। उम्मेदसिंह सोढ़ा, भाजपा नेता प्रेमाराम पाबुसरी, ग्राम विकास अधिकारी हठे सिंह सोढ़ा, जोगाराम दर्जी, अर्जुन मेघवाल, अखिलेश यादव, निहालाराम, गुलाब भील उपस्थित रहे।

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