
बस्ती. आजादी की लड़ाई में हर मोर्चे पर आगे रहने वाले फ्रीडम फाइटर स्वर्गीय सीताराम शुक्ल उस समय अग्रेजों की निगाह में चढ़ गए, जब 1919 में कांग्रेस के नासिक अधिवेशन में देश को आजाद कराने की रणनीति का प्रस्ताव रखा। वहां से लौटने के बाद बस्ती में कांग्रेस के संस्थापकों में रहने वाले सीताराम शुक्ल ने सभी आंदोलनों को लीड किया और पांच बार जेल गए। आजादी के बाद कप्तानगंज से दो बार विधायक रहे स्व. शुक्ल का गांव आज विकास की बाट जोह रहा है। पंडित सीताराम शुक्ला के पोते मदन शुक्ल, कमल शुक्ला व परपोते अतुल शुक्ल व अमित शुक्ल बताते हैं कि गांव में उनके नाम पर स्मृति द्वार व गांव में प्रतिमा लगना था। लेकिन सड़क का प्रस्ताव ग्राम प्रधान के देने के बाद भी स्वीकृत नहीं हुआ तो प्रतिमा के लिए राजस्व व पुलिस की रिपोर्ट का इंतजार है।
पंडित सीताराम शुक्ल का जन्म सल्टौआ ब्लॉक के भादी खुर्द में रंगनाथ शुक्ल व सूर्यकली के घर 1897 में हुआ। इनका विवाह किशोरी शुक्ला से हुआ। गुलामी की जंजीर इन्हें बर्दास्त नहीं थी तो पति-पत्नी दोनों ने स्वतंत्रता आंदोलन की राह पकड़ ली। 1919 के नासिक अधिवेशन में दिए भाषण से अंग्रेजों की नजर में आ गए।