
बस्ती. पीएम नरेन्द्र मोदी इमरजेंसी के नाम पर लगातार कांग्रेस को घेर रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में यहां तक कहा कि उस समय कहीं न कहीं न्यायपालिका को भी डराया गया था। उनके इस बयान को लेकर जब बस्ती जिले के बीजेपी विधायक दयाराम चौधरी से सवाल किया गया था तो उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को डराया नहीं जा सकता। साथ ही यह भी जोड़ा कि मुझे नहीं पता कि पीएम ने यह किस परिप्रेक्ष्य में कहा।
दयाराम चौधरी ने कहा कि इमरजेंसी काला अध्याय था। संविधान में कहीं ऐसा नहीं कि किसी के साथ जोर जबरदस्ती की जाय। हर चीज की एक तय संवैधानिक व्यवस्था और और देश में सब कुछ उसी आधार पर तय होता और चलता है। कहा कि इमरजेंसी का काला दिन हमारे लोकतंत्र और देश व देशवासियों के लिये काला दिवस के रूप में ही मनाया जाना चाहिये, क्योंकि जिस तरीके से एक इमरजेंसी घोषित कर लेागों की भावनाओं को आहत कर जेल में ठूस दिया गया, यह कभी लोकतंत्र की मंशा नहीं थी।
उनसे सवाल किया गाय कि क्या उस समय न्यायपालिका भी कांग्रेस की आधिनस्थ हो चुकी थी, तो उस पर उन्होंने कहा कि नहीं न्यायपालिका स्वतंत्र है और स्वतंत्र रूप से ही काम करती है। पूरे देश का उस पर भरोसा रहता है कि वह निष्पक्ष काम करेगी। जब उनसे यह कहा गया कि पीएम ने बयान दिया है कि न्यायपालिका को भी डराया गया था तो बोले, मैं नहीं जानता पीएम ने किस परिप्रेक्ष्य में ये बयान दिया। उन्होंने फिर जोड़ा कि न्यायपालिका और लोकतंत्र एक दूसरे के रक्षक हैं।
किसी को कोई डराकर काम नहीं कर सकता। लोकतंत्र की अपनी एक परिभाषा है। यहां राजतंत्र नहीं, लोकतंत्र में सबका सम्मान, सबकी सुरक्षा, सबका अधिकार और सबकी व्यवस्थाएं सब अपनी सीमा और दायरे में है। सबको अपनी अभिव्यक्ति की छूट है।
By Satish Srivastava