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ये लो टॉयलेट सीट…मेरी बेटी को एडमिशन दे दो, हम प्राइवेट स्कूल की फीस नहीं दे पाएंगे

Basti school toilet seat viral news : बस्ती जिले में एक बेबस पिता साइकिल पर टॉयलेट सीट लादकर स्कूल पहुंचा ताकि उसकी बेटी को एडमिशन मिल सके। स्कूल ने शौचालय न होने का बहाना बनाकर दाखिला देने से मना कर दिया था।

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शौचालय न होने से बच्चियों को नहीं मिल रहा कॉलेज में एडमिशन, PC- Patrika

बस्ती : एक पिता साइकिल पर टॉयलेट सीट लादकर भरी दोपहरी में स्कूल पहुंचता है और वह कहता है कि साहब मेरी बेटी को एडमिशन दे दो। हम अपनी बेटी को प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा सकते हैं। हम गरीब आदमी है। अब आप सोच रहे होंगे कि वह पिता साइकिल पर टॉयलेट सीट लेकर स्कूल क्यों पहुंचा?

मामला यह है कि उस स्कूल में यह कहकर एडमिशन नहीं दिया गया कि यहां तो टॉयलेट ही नहीं हैं। तो हम लड़कियों को एडमिशन कैसे दे दें। अब आप सोचिए कि कोई स्कूल आज भी इस अमृतकाल में ऐसा है कि उसमें टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है। लड़कियों को मूलभूत शिक्षा सिर्फ इसलिए नहीं मिल पा रही है। क्योंकि वहां टॉयलेट नहीं है।

मामला बस्ती जिले के कलवारी क्षेत्र का है। यहां झिंकू लाल त्रिवेणी राम चौधरी इंटर कॉलेज का यह वाक्या काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। यहां एक पिता अपनी बेटी के एडमिशन के लिए पहुंचा था। लेकिन, प्रबंधक ने शौचालय न होने का हवाला देकर स्कूल में एडमिशन देने से मना कर दिया।

बस यह बात एक पिता के दिल में चुभ गई और वह भरी दोपहर में साइकिल पर टॉयलेट सीट लादकर स्कूल पहुंच गया और बोला कि यह लो टॉयलेट सीट और स्कूल में शौचालय में बनवाओ और मेरी बेटी को एडमिशन दो। लेकिन, इस वाक्ये के बाद भी प्रबंधक ने बिटिया को एडमिशन देने से इनकार कर दिया।

बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा खिलवाड़

आरोप है कि स्कूल प्रबंधक अपने निजी स्कूल की मुनाफाखोरी बढ़ाने के लिए सरकारी जमीन पर संचालित कॉलेज में लड़कियों का प्रवेश रोक रहे हैं। प्रबंधक का दावा है कि कॉलेज में बाउंड्री वॉल नहीं बनी है और महिला शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, इसलिए लड़कियों को प्रवेश देना संभव नहीं है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश है। प्रबंधक जानबूझकर गरीब लड़कियों को मुफ्त सरकारी शिक्षा से वंचित कर उन्हें अपने महंगे प्राइवेट स्कूल में भेजने की कोशिश कर रहे हैं।

नियमों की धज्जियां उड़ा रहे कॉलेज

आधुनिक भारत में जहां मंगल ग्रह पर पहुंचने की बातें की जाती हैं, वहीं एक सरकारी स्कूल में लड़कियों के लिए शौचालय न होने का हवाला देकर लगभग 6० साल से उन्हें शिक्षा से वंचित रखना शिक्षा के अधिकार (RTE) का खुला उल्लंघन है। स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि प्रबंध समिति इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है, जबकि गरीब परिवारों की बेटियां फीस न भर पाने के कारण पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रही हैं।

प्रशासन की नींद टूटी, जांच के आदेश जारी

जब एक पिता अपनी बेटी का दाखिला कराने के लिए टॉयलेट सीट लेकर स्कूल पहुंचा और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, तब जाकर शिक्षा विभाग हरकत में आया। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अब सवाल यह है कि क्या बस्ती की इन गरीब बेटियों को उनका मौलिक शिक्षा का हक मिल पाएगा, या फिर इस बार भी कागजी कार्यवाही और आश्वासनों के बीच एक पिता की उम्मीदें टूटकर रह जाएंगी?