ब्यावर. नगर परिषद के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ऐतिहासिक तेजा मेले के अंतिम दिन मंगलवार को मेले में करीब छह घंटे तक महिलाओं का एकछत्र राज रहा। मेले में चारों और विविध रंगों के परिधानों में सजी शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं खरीदारी करती एवं झूलों का आनंद लेती नजर आई। बच्चों ने चाट-पकौड़ी, आइसक्रीम और झूलों का आनंद लिया तो युवतियों व महिलाओं ने सौन्दर्य प्रसाधन व घर-परिवार की जरूरतों संबंधी सामग्री की जमकर खरीदारी की। सुभाष उद्यान में मंगलवार सुबह 11 से शाम छह बजे तक मेले का समय महिलाओं के लिए निर्धारित रखा गया। शहर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र से सुबह से ही महिलाएं अपने बच्चों के साथ समूह के रूप में मेला स्थल पर पहुंचना शुरू हो गई। ग्यारह बजे बाद महिलाओं का समय शुरू होने से मेला स्थल के अंदर रहे युवकों को निकालने में पुलिस व होमगार्डस को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने मेला क्षेत्र में लगी स्टालों पर भी एक ही जने को रहने दिया। शाम तक महिलाओं ने निश्चिंत होकर मेले का लुत्फ उठाया। मेले में महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए बिचड़ली तालाब की पाल सहित सभी गेटों पर सुरक्षाकर्मी व मेले के अंदर महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन व पुलिसकर्मियों के अलावा नगर परिषद के बैज लगे कर्मचारियों की भी ड्यूटी मेले में लगाई गई। मेला क्षेत्र में लगाए कैम्प में पुलिस अधिकारी बैठकर पूरे मेले की मॉनिटरिंग करते रहे। महिलाओं के साथ दस साल तक के बच्चों को भी प्रवेश दिया गया। शाम करीब चार बजे बरसात का दौर शुरू हो गया। इसके बाद महिलाएं मेले से निकलना शुरु हो गई। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के साथ आए पुरुष सुभाष उद्यान के प्रवेश द्वार व गणपति मंदिर के निकट बैठ कर उनके लौटने का इंतजार करते रहे।