गाज़ा में चल रहा युद्ध अब अपने तिसरे साल में पहुंच चुका है। हालात बेहद खराब हो चुके हैं। मानवता पर मंडरा रहा संकट अब “विनाशकारी” स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे समय में अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की 80वीं बैठक के दौरान, अमेरिका ने गाज़ा युद्ध को खत्म करने के लिए एक नया और बेहद अहम 21 बिंदुओं वाला प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव की जानकारी ‘द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल’ ने दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बैठक को बहुत सफल बताया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, कि हमें अब कुछ करना होगा, इसे युद्ध को अब बंद करना होगा।” हमें उम्मीद है कि इज़राइल भी जल्द इन चल रही बातचीतों में शामिल हो जाएगा। ये बयान ऐसे समय पर आया है जब दुनिया भर में गाज़ा में जारी मानवीय संकट को लेकर नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
दरअसल इस बैठक में 21 बिंदुओ का एक प्रस्ताव पेश किया गया। जिसमें अमेरिका का रुख पहले के मुकाबले काफी बदल हुआ नजर आया। जहां कुछ समय पहले तक ट्रंप प्रशासन गाज़ा के लोगों को वहां से हटाने की बात कर रहा था। अब इस नई योजना में स्थानीय पुनर्निर्माण और हथियारबंद गुटों को निष्क्रिय करने पर ज़ोर दिया गया है। इस प्रस्ताव का मकसद गाज़ा को एक ऐसा इलाका बनाना है जो उग्रवाद से मुक्त हो, अपने पड़ोसियों के लिए कोई खतरा न हो। प्रस्ताव के मुताबिक जैसे ही दोनों पक्ष इस योजना पर सहमत होंगे, इज़राइल सैन्य कार्रवाई बंद करेगा और अपनी सेनाएं हटाना शुरू कर देगा। इसके 48 घंटों के भीतर सभी बंधकों की रिहाई होगी — चाहे वे ज़िंदा हों या मृत। इसके बाद इज़राइल सैकड़ों फ़िलिस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा।
खास बात ये है कि इस प्रस्ताव में गाज़ा के प्रशासन और फिलिस्तीनी सरकार का भी जिक्र किया गया है। प्रस्ताव के लागू होते ही फिलिस्तीन का संचालन एक अस्थायी ‘टेक्नोक्रेटिक’ यानी पेशेवर विशेषज्ञों की सरकार के हाथों में होगा। ये सरकार फ़िलिस्तीनी लोगों की होगी, लेकिन इसे एक नया अंतरराष्ट्रीय निकाय चलाएगा, जिसकी अगुवाई अमेरिका करेगा। इस सरकार में हमास के लिए कोई जगह नहीं होगी। साथ ही गाज़ा को पूरी तरह से असैन्य किया जाएगा। वहां मौजूद सभी हमलावर सुरंगों और अन्य सैन्य ढांचों को खत्म कर दिया जाएगा।
बता दें कि ये प्रस्ताव ट्रंप के पुराने बयानों से बिल्कुल अलग है, क्योंकि इसस पहले ट्रंप गाजा से लोगों को हटाने जैसी बात कर रहे थे, वहीं अब, वे फ़िलिस्तीनी लोगों और गाज़ा के भविष्य को लेकर बात कर रहे हैं। हालांकि इस योजना में बाद में फ़िलिस्तीनी राज्य का संकेत भी दिया गया है जो इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए एक मुश्किल राजनीतिक चुनौति बन सकता है।
ऐसे में अब राष्ट्रपति ट्रंप की इस पहल से मीडिल ईस्ट में अमेरिका की भागीदारी फिर से बढ़ने वाली है। अमेरिका अब सिर्फ़ इज़राइल का करीबी साथी नहीं, बल्कि एक लंबे समय तक शांति का संभावित ईमानदार बिचौलिया भी बन सकता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या अमरीका इजरायल को मना पाएगा? और क्या प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दो स्टेट पोलिसी के लिए तैयार होंगे? क्योंकि जैसे-जैसे युद्ध का मानवीय असर गंभीर होता जा रहा है, ये प्रस्ताव शायद आख़िरी उम्मीद है।