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लंदन के कब्रिस्तान में कार्ल मार्क्स की कब्र पर पहुंची लबूबू डॉल, मज़ेदार कमेंट्स

एक वायरल तस्वीर में देखा गया कि किसी ने मशहूर जर्मन दार्शनिक और समाजवादी विचारक कार्ल मार्क्स की कब्र पर एक तीन पन्नों का हाथ से लिखा हुआ पत्र रखा है। बताया जा रहा है कि ये पत्र चीन के एक छात्र ने लिखा था – और ऐसा करना वहां आने वाले कुछ पर्यटकों के लिए एक आम परंपरा बन चुका है।

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Pankaj Meghwal

Jul 24, 2025

लंदन के हाईगेट कब्रिस्तान में स्थित कार्ल मार्क्स की समाधि पर हाल ही में एक अजीब और दिलचस्प नज़ारा देखने को मिला।

एक वायरल तस्वीर में देखा गया कि किसी ने मशहूर जर्मन दार्शनिक और समाजवादी विचारक कार्ल मार्क्स की कब्र पर एक तीन पन्नों का हाथ से लिखा हुआ पत्र रखा है। बताया जा रहा है कि ये पत्र चीन के एक छात्र ने लिखा था – और ऐसा करना वहां आने वाले कुछ पर्यटकों के लिए एक आम परंपरा बन चुका है।

लेकिन इस बार चर्चा का कारण वो पत्र नहीं था। बल्कि सारा ध्यान खींच लिया एक छोटे से ग्रे रंग की डॉल ने – जिसका नाम है लबूबू। ये एक डिज़ाइनर टॉय है, जो इन दिनों दुनियाभर में जबरदस्त लोकप्रियता बटोर रहा है। इस खिलौने को आमतौर पर ‘क्यूट’, ‘मॉन्स्टर’ और ‘कलेक्टिबल’ के रूप में जाना जाता है – और इसकी कीमत भी काफी ज्यादा भी हो रही है।

लबूबू को पत्र के ठीक सामने, मार्क्स की कब्र पर टिकाकर रखा गया था। ऐसा लगा जैसे वो डॉल खुद कार्ल मार्क्स की समाधि की रखवाली कर रही हो – या फिर ध्यान से उनकी चिट्ठी पढ़ रहा हो।

लेकिन यहां असली दिलचस्पी उस विडंबना से पैदा हुई। जिसको देखकर सब हैरान हैं। दरअसल जिस शख्स ने पूंजीवाद की कड़ी आलोचना की, उसकी कब्र पर रखा गया एक ऐसा खिलौना जो खुद पूंजीवाद की उपज है – महंगा, कलेक्टिबल, और ट्रेंड में है। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी कुछ कम मज़ेदार नहीं रहीं।

एक यूज़र ने लिखा –
“एक पूंजीवादी ‘ग्रेस्मन’ का मार्क्स की कब्र पर बैठना… ये कविता है, और थोड़ी पागलपन भी।”

दूसरे ने मज़ाक में इसे “लबूबू x Karl Marx” का कोलैब करार दिया।

किसी ने लिखा –
“दफन पत्थर अपने आप फट गया तो हैरान मत होना।”

और कुछ लोगों ने तो लबूबू डॉल को खुद मार्क्सवाद की आलोचना का प्रतीक बता दिया –
लबूबू: दिखता मासूम, लेकिन अंदर से खाली, खर्चीला और ट्रेंड के पीछे भागने वाला। जैसे आज की विचारधारा।”

ये तस्वीर एक बार फिर दिखाती है कि कैसे इंटरनेट और पॉप कल्चर, इतिहास और विचारधारा को अजीब लेकिन दिलचस्प तरीकों से जोड़ते हैं। कार्ल मार्क्स और लबूबू – एक ऐसा मेल जो शायद खुद मार्क्स ने भी कभी सपने में नहीं सोचा होगा।