नेपाल में हुए जेनरेशन जेड के आंदोलन ने देश को भारी क्षति पहुंचाई। अब इस आंदोलन के बाद वहां अंतरिम सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश में अब नई व्यवस्था की शुरुआत हो रही है, लेकिन इसी के साथ एक सवाल भी उठ खड़ा हुआ है — कि नया प्रधानमंत्री कहां बैठेगा और कहां से देश का संचालन करेगा?
दरअसल इस हिंसक प्रदर्शन ने नेपाल की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को चकनाचूर कर दिया। नेपाल का ऐतिहासिक और सबसे बड़ा प्रशासनिक भवन है सिंह दरबार। यह वही जगह है जहां लंबे समय से नेपाल सरकार का प्रमुख प्रशासनिक कामकाज होता रहा है। लेकिन आंदोलन के दौरान इस इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। कई हिस्से जलकर खाक हो गए, अब नई सरकार के लिए ये तय करना मुश्किल हो गया है कि कौन-सा हिस्सा उपयोग के लायक बचा है या नहीं।
ऐसे में इमारत के किन हिस्सों को अभी इस्तेमाल किया जा सकता है इस मकसद से नेपाल सरकार के मुख्य सचिव नारायण आर्यल और अन्य मंत्रालयों के सचिवों ने सिंह दरबार का दौरा किया। निरीक्षण में उन्होंने पाया कि सबसे ज्यादा नुकसान प्रधानमंत्री कार्यालय, मंत्रिपरिषद, शिक्षा मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय और भौतिक अवसंरचना एवं परिवहन मंत्रालय को हुआ है। इसमें भी प्रधानमंत्री कार्यालय पूरी तरह नष्ट हो चुका है। अब सवाल यह है कि जब नया अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त होगा, तो वह काम कहां से करेगा?
फिलहाल, एक विकल्प यह सामने आया है कि गृह मंत्रालय को पुराने सामान्य प्रशासन मंत्रालय के निर्माणाधीन नए भवन में अस्थायी रूप से शिफ्ट कर दिया जाए और वहां से कामकाज शुरू किया जा सकता है। इसके साथ ही अन्य मंत्रालयों को भी नई जगहों पर स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है। सामान्य प्रशासन विभाग को पहले ही नए भवन में शिफ्ट किया जा चुका है। विदेश मंत्रालय को भी पुराने मंत्रालय भवन में ले जाने की योजना चल रही है। लेकिन अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि नया प्रधानमंत्री कहां बैठेगा।
बता दें कि जेनरेशन जेड, नई सरकार की दिशा तय कर रहा है। संघठन के नेताओं के बीच इस पर मंथन चल रहा है कि प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद को कहां से काम करना चाहिए। मुख्य सचिव ने यह साफ किया है कि जैसे ही नया प्रधानमंत्री नियुक्त होता है, सरकार के पास एक योजना तैयार है। इस योजना को प्रधानमंत्री और जेनरेशन जेड की मंजूरी मिलती है, तो नए ऑफिस की व्यवस्था लागू कर दी जाएगी। फिलहाल, नेपाल एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां नई पीढ़ी बदलाव की बागडोर संभाल चुकी है, लेकिन शासन की बुनियादी व्यवस्थाएं फिर से खड़ी करनी होंगी। प्रधानमंत्री का नया कार्यालय इसी पुनर्निर्माण की दिशा में पहला कदम हो सकता है।