महात्मा गांधी अस्पताल की व्यवस्था मरीजों की भारी भीड़ के आगे सोमवार को बेपटरी नजर आई। मरीजों के दबाव के कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई। इसने मरीजों का दर्द बढ़ा दिया। मरीज ही बल्कि साथ आए तीमारदार भी परेशान दिखे। निजी अस्पतालों में हड़ताल के कारण सोमवार को एमजीएच का आउटडोर 2500 पार कर गया। राजस्थान पत्रिका ने सोमवार को अस्पताल का जायजा लिया तो हालात हैरान करने वाले थे। चिकित्सक को दिखाने के लिए पर्ची कटाने से लेकर दवा लेने में हर मरीज को चार से पांच घंटे लग रहे थे। इलाज के लिए यहां आने वाले मरीजों का दर्द अव्यवस्थाएं और बढ़ा रही थी।
खासतौर से बुजुर्ग और बच्चों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ी। गेंदलिया की चंदा या तिलकनगर की मोनिका तो महज उदाहरण हैं। हकीकत यह है कि हर तरफ लम्बी कतार थी। अस्पताल खुलने से एक घंटे पहले ही मरीज अस्पताल पहुंच गए। भीलवाड़ा ऑर्थोंपेडिक का हब है, लेकिन अिस्थ रोग में इलाज नहीं मिलने से मरीज सर्वाधिक परेशान हैं। कमोबेश ऐसे ही हालात एमसीएच, सीएससी व पीएचसी के हैं। देश-प्रदेश में कोरोना के केस फिर बढ़ने लगे हैं। खासी-जुकाम-बुखार की जांच में कोरोना पॉजिटिव मिल रहे, लेकिन अस्पताल में भीड़ के बीच कोविड प्रोटोकोल नजर नहीं आया। एमजीएच की कमान संभालने वाले भी मरीज और तीमारदारों को राहत दिलाने के गंभीरता से प्रयास करते नजर नहीं आए। किसी जिम्मेदार ने एक बार भी आउटडोर में राउंड लेना मुनासिब नहीं समझा।
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एक नजर में अस्पताल के हाल
1000
आमदिनों में ओपीडी
2500
पहुंचा मरीजों का ग्राफ
35-40
हड्डी के प्लास्टर
110
हड्डी के प्लास्टर बांधे
5
घंटे ओपीडी में मरीज को समय लग रहा
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केस- 01
गेंदलिया की चंदा रेगर की घर पर काम करते समय अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज से मना कर दिया। उसे एमजीएच लाए, जहां आउटडोर में भारी भीड़ थी। बड़ी जद्दोजहद के बाद परिजनों ने चिकित्सक को दिखाया, लेकिन वार्ड तक पहुंचाने की प्रक्रिया में एक घंटा से अधिक लग गया।
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केस-02
भीलवाड़ा के तिलकनगर की मोनिका माहेश्वरी के पति के क्रिकेट खेलते समय पैर में फ्रेक्चर हो गया। वह निजी अस्पताल गई। वहां इलाज नहीं हुआ तो एमजीएच पहुंची। घंटों इंतजार के बाद उनके पति को चिकित्सक ने देखा। उसके बाद प्लास्टर बांधा गया। इसमें करीब डेढ़ से दो घंटे लग गए।