25 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भीलवाड़ा
shahadat ko salam कारगिल युद्ध में शहीद ओमप्रकाश परिहार ने दिखाया था अदम्य साहस, स्मारक का इंतजार
Play video

shahadat ko salam कारगिल युद्ध में शहीद ओमप्रकाश परिहार ने दिखाया था अदम्य साहस, स्मारक का इंतजार

shahadat ko salam जब-जब भारत मां की आन-बान और शान पर कोई आंच आई तब तब भीलवाड़ा जिले की वीर प्रसूता माटी के बेटों ने भी अपने रक्त से विजय का तिलक लगाया है। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के अदम्य साहस और पराक्रम की अमर दास्तान आज भी भीलवाड़ा के जहाजपुर क्षेत्र की हवाओं में गूंजती है। जहाजपुर तहसील के गाडोली निवासी शहीद ओमप्रकाश परिहार का नाम भी स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है, जिसे इतिहास कभी नहीं भुला पाएगा। कारगिल युद्ध के अंतिम चरण में जब कायर घुसपैठियों ने पीछे से वार किया, तो ओमप्रकाश परिहार एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े हो गए। ऑपरेशन विजय के दौरान 4 दिसंबर 2000 को अनंतनाग की पहाड़ियों पर दुश्मन की एक गोली उनके सीने को चीरती हुई निकल गई। सांसें थम रही थीं, शरीर रक्त रंजित था, लेकिन वतन की मोहब्बत का जज्बा इतना प्रबल था कि उन्होंने तब तक शस्त्र नहीं छोड़े जब तक अंतिम घुसपैठिए को मौत के घाट नहीं उतार दिया। लेकिन शहीद ओम प्रकाश परिहार की शहादत को सरकार वो सम्मान अब तक नहीं दे पाई जिसके वो हकदार हैं। वीरांगना मोहनी देवी मीणा ने बताया कि शहीद ओम प्रकाश परिहार की शहादत को 26 साल बीत गए लेकिन उन्हें सम्मान के तौर पर सरकार ने ना तो शहीद स्मारक बनाया और ना ही शहीद की प्रतिमा लगवाई गई। राजस्थान पत्रिका के शहादत को सलाम अभियान के तहत जहाजपुर में वीरांगना मोहनी देवी मीणा का सम्मान किया गया।

बड़ी खबरें

View All

भीलवाड़ा

राजस्थान न्यूज़