भोपाल. गांधी भवन में दो दिवसीय रंगनाद समारोह के अंतर्गत रविवार को नाटक ‘किस्सा कल्पनापुर का’ का मंचन किया गया। हरिशंकर परसाई रचित नाटक में निर्देशन विष्णु झा ने किया। नाटक में दिखाया गया कि कभी-कभी अफवाह भी बड़ी समस्या पैदा कर सकती है, इसलिए अफवाहों पर एकदम से विश्वास न किया जाए। इस नाटक में कथानक का मूल भाव यह है कि एक छोटी सी अफवाह कितनी बड़ी समस्या बन जाती है, तब उस समस्या के समाधान में पूरे राज्य की स्थिति ही विचलित हो जाती है। बाद में पता चलता है कि समस्या थी ही नहीं।
अफवाह पर न करें विश्वास ना
नाटक में एक पात्र फितरो आपा जिसे चिढ़ाने के उद्देश्य में लोग उससे कहते हैं कि कौआ तेरा कान ले गया और वह आपा भी अजीब है अपने कान को तो नहीं देखती, कौआ के पीछे भागती फिरती है। बस इसी बात का फायदा कुछ शरारती और स्वार्थी तत्व अपने अपने हित के लिए उठाते हैं और कल्पनापुर को अफवाह के माध्यम से बर्बाद कर देते हैं। हास्य और व्यंग के माध्यम से सामाजिक संदेश देते इस नाटक में मनोरंजन मात्र ही नहीं बल्कि एक विचार को संप्रेषित किया गया है कि अफवाह पर विश्वास ना करें।