Proposed Ramgarh Vishdhari Tiger Reserve: रामगढ़ में हर्बीवोर्स लाने की तैयारी ने पकड़ा जोर, वन विभाग चारे की कर रहा व्यवस्था-video
बूंदी. प्रस्तावित रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बनाए एनक्लोजर में जल्द ही भरतपुर घना अभयारण्य से हर्बीवोर्स लाने की तैयारी ने जोर पकड़ लिया है। यहां बन रहे एनक्लोजर का काम अब अंतिम दौर में है। ऐसे में बाघिन शिङ्क्षफ्टग से पहले यहां शाकाहारी वन्यजीवों को छोड़ा जाना है। इसे लेकर अब वन विभाग एनक्लोजर में शाकाहारी वन्यजीवों के रहने, खाने -पीने की व्यवस्था में जुटा हुआ है।
चारे के लिए कर रहे व्यवस्था
यहां एनक्लोजर का काम खत्म होते ही 150 चीतल भरतपुर के घना अभयारण्य से लाए जाने हैं। इन्हें यहां एनक्लोजर में छोड़ा जाएगा। इसके चलते यहां एनक्लोजर में ही उनके लिए घास उगाने का प्रबंध किया जा रहा है। ताकि शाकाहारी वन्यजीवों को भोजन मिलता रहे। इसके साथ ही पानी के लिए वाटर प्वाइंट बनाए गए हैं।
बारिश तक बाघिन लाने की संभावना
यहां पहले बाघिन शिङ्क्षफ्टग अप्रेल माह में किए जाने की संभावना थी, लेकिन अब तेज गर्मी होने व एनक्लोजर का काम देरी से होने के कारण बाघिन आने में थोड़ा समय का इंतजार और बढ़ता नजर आ रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार एनक्लोजर बनने के बाद पहले हर्बीवोर्स शिफ्ट किए जाएंगे। इसके बाद बाघिन लाने के प्रयास शुरू होंगे। इसमें एनटीसीए से परमिशन आने और बाघिन का चयन और शिङ्क्षफ्टग में थोड़ा समय लगेगा। ऐसे में इन परिस्थितियों और तेज गर्मी को देखते हुए बारिश तक बाघिन शिङ्क्षफ्टग की जाने की संभावना है।
सेहतमंद हुआ टी -115
रणथम्भौर से करीब 2 साल पहले निकला बाघ अब सेहतमंद नजर आ रहा है। बाघ की उम्र वर्तमान में करीब 5 साल की बताई जा रही है। ऐसे में इसके आकार और हेल्थ में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। विभाग के फोटो ट्रेप कैमरे में बाघ की तस्वीर में भी यह अंतर नजर आने लगा है। अधिकारियों का कहना है कि यहां बाघ के अनुकूल वातावरण होने और लगातार शिकार मिलने के चलते उसकी सेहत में काफी बढ़ोतरी हुई है। गौरतलब है कि बाघ टी 115 रामगढ़ में वर्ष 2013 में आए बाघ टी 62 का बेटा बताया जाता है।
जैतपुर से रामगढ़ रेंज की ओर बढ़ा बाघ
बाघ टी 115 का मूवमेंट रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में लगातार बना हुआ है। बाघ दो दिन पहले जैतपुर रेंज से रामगढ़ रेंज की ओर बढ़ा था। बाघ की मॉनिटरिंग लगातार की जा रही है।
एनक्लोजर का काम अंतिम दौर में है। यहां हर्बीवोर्स को लाने के लिए तैयारी की जा रही है। एनक्लोजर बनने के बाद पहले हर्बीवार्स लाकर एनक्लोजर में छोड़े जाएंगे।
धर्मराज गुर्जर, क्षेत्रीय वन अधिकारी, जैतपुर रेंज