पांच साल बाद भी लिफ्ट सिंचाई परियोजना अधूरी-video
गेण्डोली. गेण्डोली फोलाई पंचायत क्षेत्र की महत्वाकांक्षी लिफ्ट सिंचाई परियोजना का काम पांच साल बाद भी पूरा नहीं होने से ग्रामीणों में नेताओं व प्रशासन के प्रति नाराजगी है। उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के क्रियान्वित होने पर जहां क्षेत्र के डेढ़ दर्जन गांवों के लोगों सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा, वहीं यहां स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों से वर्ष भर विद्युत विभाग को करीबन 500 मेगावाट बिजली दी जाती रहेगी।
भाजपा शासनकाल के दौरान वर्ष 2016 में तत्कालीन विधायक एवं पंचायती राज मंत्री बाबूलाल वर्मा के प्रयासों से जल संसाधन विभाग द्वारा गेण्डोली पंचायत क्षेत्र के सात गांवों की 1987.84 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने के लिए
लगभग 67.52 करोड़ रुपए एवं फोलाई पंचायत के दस गांवों की 1997.78 हेक्टेयर भूमि को सिंचित किए जाने के लिए 56.36 करोड रुपए की लागत से अलग अलग दो लघु सिंचाई परियोजनाओं की मंजूरी मिली थी। दोनों परियोजनाओ को लोहली गांव के निकट मेजनदी पर स्थापित किया जाना प्रस्तावित था ।
राज्य सरकार द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के बाद दोनों सिंचाई परियोजनाओं के निर्माण के लिए महाराष्ट्र की कम्पनी को टेण्डर दिया गया और परियोजना को दो साल की अवधि के अंतराल में वर्ष 2019 तक पूर्ण करके सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाया जाना था, लेकिन सम्बंधित निर्माण कम्पनी की लापरवाही एवं क्षेत्रीय नेताओं व प्रशासन की उपेक्षा के चलते यह महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना पांच साल बाद भी पूरी नहीं सकी, जिससे क्षेत्र के काश्तकारों में मायूसी एवं नाराजगी है।
ऐसे पहुंचेगा खेतों तक पानी
जल संसाधन विभाग के अनुसार काश्तकारों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए मेज नदी में दो इंटेक वेल खोदे गए हैं। उन इन्टेक वैलो से नदी का पानी फिल्टर होकर सत्तर मीटर दूर बने चार जैकवैलो तक पहुंचेगा और जैकवैलो का पानी उच्च स्तरीय पम्प सेट द्वारा क्षेत्र में बीस अलग अलग स्थानों पर बनी डिग्गी में पहुंचेगा और वहां एचडीपीआई पम्पों द्वारा खेतों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाया जाएगा।
वर्ष भर उपलब्ध कराई जाएगी बिजली
परियोजना के तहत मेज नदी पर 167- 167 मेगावाट के दो सौर ऊर्जा संयंत्र एवं बीस डिग्गी पर दस दस मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए है। इन सौर ऊर्जा संयंत्रों पर पूरे वर्ष भर विद्युत उत्पादन होगा, जिसे निगम को बेचा जाएगा। जबकि इस सिंचाई परियोजना के क्रियान्वयन के लिए विद्युत निगम द्वारा यहां 33 केवी विद्युत लाइन पहुंचाना व विद्युत ट्रांसफार्मर लगाना था और सौर ऊर्जा को प्राप्त करने के लिए अलग से विद्युत लाइन डालना था, लेकिन निगम की लापरवाही के चलते न तो यहां विद्युत ट्रांसफार्मर स्थापित हुए हैं और ना ही विद्युत लाइन डालने का काम पूरा हो सका है। जबकि विद्युत निगम को सम्पूर्ण राशि जमा करवाई जा चुकी है। बिजली के अभाव में निर्माण कम्पनी को निर्माण कार्य में आवश्यक बिजली के लिए जरनेटर से काम चलाना पड़ रहा है, जो उनके लिए काफी मंहगा व परेशानी वाला साबित हो रहा है।