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सौंदर्य, कला और आध्यात्म का नृत्य में दिखा संगम
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सौंदर्य, कला और आध्यात्म का नृत्य में दिखा संगम

खजुराहो नृत्य महोत्सव की तीसरी शाम

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छतरपुर। पर्यटन नगरी खजुराहो के मुक्ताकाशी मंच पर शाम ढलते ही शास्त्रीय नृत्यों की जो प्रस्तुतियां होती हैं वह देखने लायक होती हैं। इन नृत्यों को परखने और समझने वाले अपना सब कुछ भूलकर नृत्य में खो जाते हैं। शास्त्रीय नृत्यों में सौंदर्य, कलात्मकता और आध्यात्म का संगम दिखाई देता है। अंतर्राष्ट्रीय नृत्य महोत्सव के तीसरे दिन शोबना चंद्रकुमार पिल्लई ने भरतनाट्यम, सुप्रभा मिश्रा ने ओडिसी तथा आनंदा शंकर जयंत ने भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। भक्ति, भाव और संदेश का अनूठा संयोग दर्शकों को मंत्रमुग्ध किए रहा।
काली के भयप्रद रुप को दिखाया
शोबना चंद्रकुमार पिल्लई ने भरतनाट्यम शैली में अटपति व वर्शिप नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी। उन्होंने कालीकवच और काली देवी सोत्रम की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। राग व ताल व भाव के संगम से अपनी प्रस्तुति में शिव के अर्धनारी स्वरुप का वर्णन किया। इसके साथ ही राक्षसों का संहार करते समय मां काली द्वारा बनाए गए भयप्रद रौद्र रुप की प्रस्तुति भी की गई। पदम्श्री से सम्मानित भरतनाट्यम की जानीमानी नृत्यांगना शोबना चंद्रकुमार पिल्लई ने भरतनाट्यम की जो प्रस्तुति दी वह अविस्मरणीय रही। अपने नृत्य में पारंपरिक मूल्यों तथा नवाचारों को समाहित करने वाली शोबना पिल्लई ने कॉमर्शियल फिल्म से लेकर नाटक, संगीत निर्देशन एवं शास्त्रीय नृत्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
ओडिसी समूह नृत्य के जरिए समझाया पानी का महत्व
सुप्रभा मिश्रा व उनके साथियों ने ओडिसी नृत्य के जरिए गुजरात की रानी उदयमति द्वारा बनवाई गई बाबड़ी की कहानी के माध्यम से पानी के महत्व को समझाया। ताल व राग की लय पर जल ही जीवन है का संदेश ओडिसी समूह नृत्य से दिया गया। इसके बाद भगवान विष्णु के दशावतारों का नृत्य के माध्यम से वर्णन किया। नृत्य के जरिए बताया कि कैसे वराह अवतार लेकर भगवान ने पृथ्वी को जलमग्न होने से बचाया। सुप्रभा मिश्रा प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना, कोरियोग्राफर व लेखक हैं। 30 वर्षों से दुनिया के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर सृजनात्मकता एवं उच्च श्रेणी की कला का प्रदर्शन कर सबको अपनी ओर खींचने का प्रयास किया है। ओडिसी नृत्य के लिए इंदिरा गांधी राजभाषा पुरुस्कार से सम्मानित मिश्रा ओम आटर््स डांस अकादमी गुजरात की संस्थापक के साथ-साथ गुजरात सरकार की कल्चरल एम्बेस्डर हैं।
जीवन के 9 भावों को दर्शाया
हैदराबाद से आईं आनंदा शंकर जयंत व उनकी टीम ने जीवन के 9 रसों पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति की। उन्होंने किसी कहानी के आधार पर भावों की प्रस्तुति न देकर नृत्य, अभिनय, कोरियोग्राफी के अनुसार रौद्र, वीर, हास्य, श्रृंगार, करुणा, भयानक, वीभत्स जैसे भावों को समूह नृत्य के जरिए प्रस्तुत कर सबका ध्यान खींचा। उनकी प्रस्तुति श्रीकृष्णं वंदे जगतगुरुम्, बुद्धं शरणं गच्छामि, नवरसा-एक्सप्रेशन ऑफ लाइफ जैसी उत्कृष्ट कृतियां खूब सराही गई हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में कई बार ऐसा भी होता है कि बिना किसी कारण हंसना, रोना आता है। जरूरी नहीं है कि किसी दूसरे की कहानी पर ही भाव आए, अपने जीवन की घटनाओंके बारे में भी सोचकर भाव महसूस होते हैं। पद्मश्री पुरुस्कार से सम्मानित आनंदा शंकर जयंत एक ऐसी नृत्यांगना हैं जो न केवल भरतनाट्यम में पारंगत हैं बल्कि कूचिपूडि़ में भी महारथ हासिल है।

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