छिंदवाड़ा. सकल दिगम्बर जैन समाज ने शनिवार को उत्तम आकिंचन्य धर्म की आराधना की। सभी ने पर्युषण के नवे लक्षण की आराधना करते हुए उसका स्वरूप जाना और उसके अनुसार जीवन में चलने का संकल्प लिया।
स्वाध्याय भवन में हुए प्रवचन में प्रतीति शास्त्री ने कहा कि तीनों लोकों में निज शुद्धात्मा के अतिरिक्त मेरा कुछ भी नहीं है। वास्तव में यही आकिंचन्य धर्म है। इसलिए निज शुद्धात्मा ही एक मात्र शरण और सार है जिसको हमने अनादि से भूला हुआ है। पर्वाधिराज पर्युषण दसलक्षण धर्म शुद्धात्मा से परिचय कराकर उससे मिलन कराने का मंगलकारी महोत्सव है रविवार को दसवें लक्षण उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की मंगल आराधना की जाएगी।
पं शांतिकुमार पाटिल ने प्रवचन में कहा कि पर पदार्थों के प्रति आसक्ति एवं उनका परिग्रह का भाव आकिंचन्य धर्म प्रगट नहीं होने देता। युवा फेडरेशन के सचिव दीपकराज जैन ने बताया कि रविवार को सकल दिगम्बर जैन समाज उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना करते हुए अनंत चतुर्दशी महापर्व मनाएगा। सुबह विधि विधान से पूजा-अर्चना प्रवचनों और विशेष कक्षाओं के साथ रात को जिनेंद्र भक्ति होगी। ज्ञानवर्धक साहित्यिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी जाएगी।
तीन दिन बंद रहेंगे पशु वधगृह: रविवार, सोमवार और मंगलवार तीन दिन पशु वधगृह बंद रहेंगे। 23 सितम्बर को अनंत चतुर्दशी, 24 को पर्युषण के आखिरी दिन और 25 सितंबर को क्षमावाणी महोत्सव को देखते हुए यह आदेश मप्र शासन ने दिया है। निगम क्षेत्र के मटन मार्केट, मांस मछली की दुकानें भी बंद रखने के निर्देश दे दिए गए हैं।
विमर्शसागर महाराज ने कहा- पर पदार्थों से सम्बंध त्याग ही आंकिंचन्य भाव
छिंदवाड़ा . ससत्य को जाना न जाए तब तक जीवन की सार्थकता नहीं होती। जब तक आत्मा में आकिंचन्य भाव उत्पन्न न हो तब तक आत्मा सुखी नहीं हो सकती। यह बात भावलिंगी संत विमर्शसागजी महाराज ने गुलाबरा आदिनाथ जिनालय में कही। उन्होंंने कहा कि आंकिंचन्य धर्म कहता है कि आपका जगत में कुछ भी नहीं, न अहंकार को धरो न असंतुष्ट बनो। पदार्थों के प्रतिमूर्छा कष्ट का कारण बनती है। हमने निश्चय को निश्चय नहीं माना अपने व्यवहार को व्यवहार नहीं जाना। त्याग पर का होता है निजात्म तत्व के सिवाय न कुछ हमारा आज तक हुआ न होगा। इसलिए पराश्रित नहीं स्वाश्रित बनो।