चूरू. राज्य में कई ई-मित्र संचालक भवन निर्माण ठेकेदारों व श्रमिक यूनियनों की फर्जी सील लगाकर मजदूरों के बच्चों से छलावा कर अपनी जेबें भर रहे हैं।
श्रम विभाग ने इस तरह ठेकेदारों व श्रमिक यूनियनों की फर्जी सील लगाकर छात्रवृति के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदन को निरस्त करना शुरू कर दिया है। मगर ई-मित्र संचालकों की इस कारगुजारी से अनजान अपने बच्चों के लिए छात्रवृति मिलने का इंतजार कर रहे मजदूर श्रम विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। इस तरह के केस सामने आने के बाद विभाग ने इन पर अंकुश लगाने के लिए १२ फरवरी २०१९ से आवेदन नियमों में मामूली बदलाव भी किया है। अधिकारियों के मुताबिक अब मजदूर को छात्रवृति के लिए आवेदन करते समय आवेदन पत्र के साथ ठेकेदार की ओर से जारी अपने यहां काम करने के प्रमाण पत्र के साथ ही उसका जीएसटी या पैन नंबर भी लगाना होगा। इससे ई-मित्र संचालक किसी ठेकेदार के नाम से उसकी फर्म की फर्जी सील लगाकर मजूदर का आवेदन नहीं कर सकेंगे।
ये दस्तावेज भी होंगे मान्य
-भवन निर्माता निजी मकान निर्माण के दौरान मजदूरी करने का प्रमाण पत्र मजदूर को जारी कर सकेंगे। इसके लिए भवन निर्माता को अपना आधार नंबर देना होगा।
-किसी भी पंजीकृत श्रमिक यूनियन का अध्यक्ष या सचिव मजदूर को प्रमाण पत्र जारी कर सकेगा। इन्हें अपना आधार कार्ड या अन्य कोई पहचान आईडी लगानी होगी।
– इसके अलावा मजूदर आवेदन के साथ मनरेगा में काम करने की अपनी ९० दिन की हाजरी सत्यापित करवाकर भी लगवा सकता है।
मजदूरों के सामने आ रही ये दिक्कत
खुली मजदूरी करने वाले श्रमिकों के सामने बच्चों की छात्रवृति के लिए आवेदन करने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि वे ठेकेदार के यहां खुली मजदूरी करते हैं। उन्हें कभी काम मिलता है और कभी नहीं। ऐसे में ठेकेदार से उसका जीएसटी या पैन नंबर लेकर आवेदन करने में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कई ई-मित्र संचालकों की ओर से ठेकेदारों-श्रमिक यूनियनों की फर्जी सील लगाकर छात्रवृति के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा रहे है। ऐसे संचालकों व फर्जी श्रमिकों पर अंकुश लगाकर पात्रजनों को लाभान्वित करने के लिए विभाग ने नियमों में बदलाव किया है।
उमेश रायका, श्रम निरीक्षक
श्रम विभाग, चूरू