दौसा. पैगंबर मोहम्मद हजरत सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश के मौके पर गुरुवार को ईद मिलादुन्नबी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान जिला मुख्यालय पर बज्मे गरीब नवाज कमेटी के तत्वावधान में विशाल जुलूस निकाला गया। लोगों ने घरों व मार्गों में सजावट कर झण्डे लगाए। कुरानखानी, नमाज, नातशरीफ पढकऱ इबादत की। अमन शांति और भाईचारे की दुआ की गई।
जुलूस सुबह 10 बजे शेखान मोहल्ला से हाफिज जियाउल मुस्तफा व हाफिज नूरूलहुदा ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। जूलूसे मोहम्मदी सदर चौक, लालसोट रोड, बरकत स्टेच्यू होते हुए हजरत शाह जमालबाबा की दरगाह पर पहुंचा तथा चादर पेश की। सभी लोगों ने अमन, शांति, भाईचारे की दुआएं मांगी तथा सलाम पेश कर मिठाइयां बांटी गई। जुलूस में बड़ी संख्या में लोग झण्डे लेकर मोहम्मद साहब की शान में नाते पेश करते हुए आगे बढ़े। कई जगह लोगों ने पुष्प बरसाकर जुलूस का स्वागत किया। मिठाइयां, खीर, फल आदि बांटे गए।
कमेटी के सचिव तालिब हुसैन ने बताया कि इस्लाम धर्म के आखिरी नबी पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की योमे पैमाइश (जन्मदिन) की खुशी में जश्ने ईद मिलादुन्नबी पर जुलूस सहित अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान बज्मे गरीब नवाज कमेटी, आला हजरत कमेटी, फैजान गरीब नवाज कमेटी, बज्मे गोसे आजम कमेटी, अंजुमन तामिर मिलत दौसा कमेटी सहित अन्य संगठनों के सदस्य व आमजन मौजूद रहा। सभी कमेटी के सदस्य एवं अतिथियों का पगड़ी बांधकर स्वागत किया गया।
अमन व भाईचारे का पैगाम
हाफिज जियाउल मुस्तफा व हाफिज नूरूलहुदा ने बताया कि जश्ने ईद मिलादुन्नबी पर जुलूसे मोहम्मदी के माध्यम से लोगों को अमन, शांति, भाईचारा, मोहब्बत का पैगाम दिया जाता है। सच्चाई, ईमान, सही रास्ते पर चलना, दूसरों की मदद करना, बड़ों का सम्मान, बुराई से बचना, माता पिता की सेवा, झूठ नहीं बोलना, समाज की भलाई, गरीबों की मदद करने की सीख दी। उन्होंने बताया कि हजरत मोहम्मद ने इस्लाम धर्म का प्रवर्तन किया। ये इस्लाम के सबसे महान नबी और आखिरी संदेशवाहक माने जाते हैं।