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दौसा-लालसोट में लंपी का कहर सर्वाधिक, जिले में अब तक 16660 केस, 431 मौत
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दौसा-लालसोट में लंपी का कहर सर्वाधिक, जिले में अब तक 16660 केस, 431 मौत

प्रशासनिक व जनता की मदद से आइसोलेशन वार्ड भी बनाए  

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दौसा. गौवंश पर कहर बरपा रहे लंपी वायरस का जिले में जबरदस्त प्रकोप देखने को मिल रहा है। सरकारी आंकड़ों की माने तो जिले में तकरीबन 16 हजार 660 गौवंश लंपी रोग से ग्रसित हैं, इसमें से 3290 रिकवर(स्वस्थ) हो चुके हैं। वहीं, अब तक 431 गौवंश की लंपी की वजह से मौत हो चुकी है। वहीं जमीनी हकीकत सरकारी आंकड़ों से बिल्कुल विपरीत हैं। बड़ी संख्या में लंपी वायरस से गायों की मौत हो रही है। सर्वाधिक कहर लालसोट व दौसा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। हालांकि पशुपालन विभाग द्वारा लंपी वायरस की रोकथाम को लेकर कई कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासनिक व जनता की मदद से आइसोलेशन वार्ड भी बनाए गए हैं, लेकिन शहर से लेकर गांवों तक आवारा घूमते गौवंश से लंपी वायरस के फैलाव बढ़ता जा रहा है।
जिले में 2 अगस्त को भांडारेज से शुरू हुआ लंपी वायरस केसेज का मिलना अब पूरे जिले में पैर पसार चुका है। जिले में इससे पीडि़त गौवंश की संख्या बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के विपरीत जिले में अब तक लंपी के प्रकोप से सैंकड़ो गौवंश की मौत हो चुकी है। जिले के दौसा, लालसोट, लवाण रामगढ़ पचवारा सहित सभी उपखंड क्षेत्रों में लंपी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

वर्ष 2019 की गणना के अनुसार दौसा जिले में 1 लाख 51 हजार 118 गौवंश है। पशुपालन विभाग के अनुसार सामान्यत प्रतिदिन औसतन 20 गायों की मौत होती है, अब लंपी के असर से यह आंकड़ा दो-तीन गुना हो गया है। चिह्नित केसेज के अलावा जिले में करीब 46 हजार से अधिक संभावित संक्रमित पशु हैं। पूर्व में डेयरी ने गौवंश में टीकाकरण किया था, लेकिन अब पूरे जिले में रोग फैलने के कारण टीकाकरण उपयोगी नहीं है। सबसे बड़ी समस्या आवारा गौवंश की देखरेख में हो रहा है। गौशाला संचालन खुद की गायों को बचाने में लगे हुए हैं, ऐसे में दूसरी गायों को शरण देने में आनाकानी करते हैं। मंगलवार को जिले में 1 हजार 51 नए लंपी केस व 38 गायों की मौत हो गई।

मिशन मोड पर हो बचाव कार्य
लंपी की रोकथाम में पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी चक्करघिन्नी हो रहे हैं, लेकिन अब वायरस का असर इतना बढ़ चुका है कि अकेले एक विभाग से हालात काबू में नहीं हो सकते हैं। अन्य विभागों के कार्मिकों को भी लगाकर मिशन मोड में बचाव कार्य चलाने की जरूरत है। खासकर शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय व ग्रामीण इलाकों में पंचायतराज के सहायता से आवारा गोवंश में संक्रमण रोकने के इंतजाम व मृत गायों के निस्तारण की व्यवस्था को सु²ढ़ किए जाने की जरूरत है।


लंपी वायरस के लक्षण नजर आते ही तुरंत पशु को अलग कर उपचार कराएं। चिकित्सकीय सलाह पर ओरल मेडिसिन का प्रयोग करें। पशु के चारे-पानी का सही प्रबंध करें। जिलेभर में पशु चिकित्सा टीम नियंत्रण में जुटी हुई है। रोगग्रस्त गाय का दूध उबालकर काम लिया जा सकता है।
डॉ. प्रहलाद मीना, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग दौसा

शहर के गौसेवकों ने राम मंदिर में करीब 125 गायों को आश्रय देकर उपचार व देखभाल की व्यवस्था की है। चार-पांच अन्य जगह भी आश्रय स्थल खोले जाने हैं, लेकिन इसके लिए प्रशासन की मदद की आवश्यकता है।
सुशील शर्मा, गौसेवक

दौसा शहर में गौसेवकों की टीम ने अभियान चलाकर 50 से अधिक लंपी पीडि़त गायों को श्रीराम मंदिर गौशाला लंपी उपचार सेंटर में भर्ती कराया। इस दौरान एक बीमार गाय गिरकर घायल हो गई। सूचना पर रात्रि 11 बजे पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक प्रहलादङ्क्षसह अपने साथ वरिष्ठ पशु चिकित्सक रमेश मीना सहित टीम को लेकर तत्काल मौके पर पहुंचे और गायों का उपचार किया।