अंकित जाजू सोनकच्छ . इकलेरा में ग्रामीणों ने जिस तेंदुए रामू के साथ सेल्फी ली, साथ में घुमाया और मस्ती की, वही अब अपना सीधापन छोड़ अपने मूल स्वभाव में आ रहा है। अब वह धीरे-धीरे आक्रामक भी होता जा रहा है। हालत यह है कि दस लोग मिलकर भी उसे स्लाइन नहीं चढ़ा पा रहे हैं। यह सब संभव हुआ पशु चिकित्सकों और वन विभाग के अमले की अथक मेहनत की वजह से।करीब 18 दिन पहले पीपलरावां थाने के इकलेरा गांव के समीप जंगल में ग्रामीणों को तेंदुआ नजर आया था। ग्रामीण उससे पालतू मवेशी की तरह व्यवहार कर रहे थे। जांच में पता चला कि उसे वायरल इंफेक्शन है और इसके कारण उसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। गंभीर दशा में उसे इंदौर भेजा गया, जहां से उसकी बीमारी को लाइलाज बताकर सोनकच्छ लौटा दिया गया।
इलाज व भोजन पर रखी निगरानी
5 सितंबर को इंदौर से सोनकच्छ लाए गए रामू तेंदुए को वन विभाग के अमले ने अपने परिवार के सदस्य की तरह रखा। उसके इलाज, उसके भोजन व रहन-सहन पर निगरानी रखी। पशु चिकित्सक व वन विभाग ने कर्मचारियों के अथक प्रयास रंग लाते दिख भी रहे हैं। तेंदुए रामू की सेहत में अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
आहार में बढ़ोत्तरी से आक्रामक हुआ रामू
सोनकच्छ में आने के बाद रामू ने पहले सप्ताह तक केवल पानी ही पिया। फिर उसे धीरे-धीरे आहार देना शुरू किया। गुरुवार को 1 किलो तो शुक्रवार को 2 किलो चिकन रामू को दिया गया। वह पानी भी भरपूर मात्रा में पी रहा है।
8 फ़ीट लंबा और 5 फीट चौड़ा पिंजरा बनकर तैयार
छोटे पिंजरे और सिर में चोट को देखते हुए प्रयास किया कि कहीं से बड़ा पिंजरा मिल जाए, लेकिन उपलब्धता नहीं होने के कारण अब नगर में ही नया पिंजरा बनवाया जा रहा है। वर्तमान पिंजरा 6 फ़ीट 3 इंच लंबा और चार फीट चौड़ा था। नए पिंजरे को बढ़ाकर 8 फ़ीट लंबा और 5 फ़ीट चौड़ा बनाया गया है जो शुक्रवार शाम तक बनकर तैयार हो गया है।
-सोभाल सिंह भाटी, डिप्टी रेंजर वन विभाग