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पालीताना शैली में संगमरमर से बना दादावाडी जिन मंदिर
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पालीताना शैली में संगमरमर से बना दादावाडी जिन मंदिर

शहर के गब्बूर स्थित दादावाड़ी मंदिर विशाल परिसर में बनाया गया है। यह राज्य के सबसे विशाल दादावाड़ी मंदिर है। श्री आदिनाथ जिन मंदिर एवं दादावाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश बाफना ने पत्रिका से विशेष बातचीत में मंदिर के बारे में जानकारी दी कि वर्ष 2008 में खतरगच्छ संघ के आचार्य मणिप्रभसागर, साध्वी सूर्यप्रभाश्री, पूर्णप्रभाश्री (भागु महाराज) ने दादावाड़ी मंदिर निर्माण करने की प्रेरणा दी।

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कर्नाटक के सबसे विशाल दादावाडी मंदिर में शुमार

विशाल भवन रहने की सुविधा

हर पूर्णिमा व अमवास्य पर होती है विशेष पूजा

हुब्बल्ली. शहर के गब्बूर स्थित दादावाड़ी मंदिर विशाल परिसर में बनाया गया है। यह राज्य के सबसे विशाल दादावाड़ी मंदिर है।

श्री आदिनाथ जिन मंदिर एवं दादावाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश बाफना ने पत्रिका से विशेष बातचीत में मंदिर के बारे में जानकारी दी कि वर्ष 2008 में खतरगच्छ संघ के आचार्य मणिप्रभसागर, साध्वी सूर्यप्रभाश्री, पूर्णप्रभाश्री (भागु महाराज) ने दादावाड़ी मंदिर निर्माण करने की प्रेरणा दी। 2008 में ही मणिप्रभसागर ने श्री आदिनाथ जिन मंदिर एवं दादावाड़ी ट्रस्ट के गठन किया। भीकचंद छाजेड़ को अध्यक्ष बनाया।

मणिप्रभसागर की प्रेरणा से गब्बूर में 80 हजार वर्ग फिट जगह खरीदी गई।

इनकी प्रेरणा से गब्बर में दादावाड़ी मंदिर का उद्घाटन 6 दिसंबर 2014 में को किया गया। मंदिर का निर्माण कार्य 2010 में शुरू किया और 2014 में मंदिर निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। दादवाड़ी मंदिर परिसर 15000 वर्ग फिट में फैला हुआ है। पहली मंजिल पर मूल नायक आदिनाथ भगवान, विमलनाथ और सिमन्दर स्वामी, पुण्डरीक स्वामी, गौतम स्वामी की मूर्तियां हैं। भू तल पर जिनकुशल के चौथे दादागुरु की मूर्ति, काला भैरुदेव, गोरा भैरुदेव, जिनदत्तसुरि, जिनचन्द्रसूरि की प्रतिमा समेत अम्बिका देवी, ओसेजी माता, घंटाघर महावीर, भोमियाजी की मूर्तियां हैं। बाहर अगल बगल के गम्भारे (गर्भ गृह) में पद्मावती देवी और नाकोड़ा भैरव मंदिर बने हुए हैं। पूरा मंदिर पालीताना शैली में संगमरमर से बना है।

साध्वी सूर्यप्रभा, पूर्णप्रभाश्री ने समाज के सभी तबकों को जोडऩे, कम से कम पैसे में अच्छी सेवा देने, कम खर्च में अच्छी शादी हो सके इसके लिए मंदिर के साथ भवन, अतिथि गृह, भोजनशाला, धर्म शाला निर्माण की प्रेरणा दी। इसके तहत विशाल भवन का निर्माण किया गया है। धर्मशाला का निर्माण किया गया जिसमें 300 लोगों रह सकते हैं। 2000 वर्ग फिट की रसोई, 7000 वर्ग फिट का डाइनिंग हाल, 7000 वर्ग फिट का रिसेप्शन व परवचन हाल, 28 वातानुकूलित कमरे (ऐसी रूम) एक कमरे में 5 से 8 लोग रह सकते हैं) का निर्माण किया। मंदिर और भवन समेत पूरे परिसर में कुल 66 सीसीटीवी कैमरा लगे हुए हैं। 7 दिनों तक प्रितिष्ठा महोत्सव हुआ था। प्राणप्रतिष्ठा के अवसर पर 6 दीक्षाएं हुई। अब तक इस परिसर में 7 से 8 दीक्षाएं हुई हैं।

मुम्बई, पुणे से बेंगलुरु, चेन्नई और बेंगलुरु, चेन्नई से पुणे, मुम्बई आने जाने बालों को रुकने के लिए बेहतरीन व्यवस्था, पूजा करने के लिए भव्य मंदिर है। यह राज्य का पहला भव्य व विशाल मन्दिर है।
हर माह पूनम को भाती सेवा की जाती है, जिसमें 1000 से 1200 भाती का वितरण होता है। पूनम और अमावस्य पर महिला मंडल की ओर से भक्ति प्रार्थना होती है।

यहां पर आचार्य मणिप्रभसागर, साध्वी सूर्यप्रभाश्री, पूर्णप्रभाश्री (भागु महाराज), राष्ट्रसंत नरेश मुनि, अजितशेखर सूरीश्वर, विमल सागर, आचार्य चन्द्रप्रभ, ललितप्रभ समेत खतरगच्छ के सभी साधु साध्वियों ने दौरा किया है। यह खतरगच्छ समुदाय का मंदिर है।
यहां की जागृत मूर्तियां हैं, दादागुरु की चमत्कारी मूर्ति है। इससे जैन समाज के लिए खास कृपा बरस रही है। यहां जो भी आता है उसकी मनोकामना पूरी होती है। शांति मिलती है।

जिनकुशल युवा मंच, जिनकुशल महिला मंडल, श्री आदिनाथ दादावाड़ी ट्रस्ट के सभी ट्रेस्टिगण पूजा-पाठ, धर्मिक कार्यक्रमों, अनुष्ठानों में भरपूर सहयोग दे रहे हैं। इसके अलावा गरीब बच्चों की फिज, पुस्तक आदि के लिए भी मदद कर रहे हैं।
इस वर्ष 6 दिसंबर को 10 साल पूरे हुए हो जाएंगे। दस साल के उपलक्ष्य में आचार्य मणिप्रभसागर, साध्वी सूर्यप्रभाश्री, पूर्णप्रभाश्री (भागु महाराज) मंदिर व भवन का निरीक्षण कर भव्य कार्यक्रम किया। आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई और भव्य कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया।

श्री आदिनाथ जिन मंदिर एवं दादावाड़ी ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश बाफना, सचिव पुखराज कवाड़, उपाध्यक्ष बाबुलाल संकलेचा, कोषाध्यक्ष मोहनलाल कांकरिया, मोहनलाल बाफना, प्रकाश छाजेड़, अशोक छाजेड़, मांगीलाल बंदामुत्ता मंदिर के सुचारू संचालन, कार्यक्रमों के आयोजिन और रखरखाव में जुटे हुए हैं।