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Debate in College: छात्रसंघ चुनाव क्यों होना चाहिए जरूरी, क्या इससे बढ़ रही अराजकता, जानिए छात्रों की राय

छात्रसंघ और छात्रराजनीति पर छात्रों ने खुलकर रखी अपनी बात

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भारत में राजनीति को जीवनचर्या का हिस्सा कहा गया है तो छात्रसंघ राजनीति में मुख्यधारा की राजनीति की नर्सरी। राजनीति की इस नर्सरी से निकले अनेक छात्रनेता भारतीय राजनीति की क्षितिज पर अपनी जगह बनाए हैं। लेकिन यूपी में पिछले कुछ सालों से राजनीति की यह नर्सरी सूख सी रही है। राजनैतिक दल युवाओं को अपनी ओर लुभाने के लिए तमाम कवायद भले ही करते हो लेकिन छात्रसंघों की उन्नति के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे। अव्वल यह कि सत्ता में आने के बाद कई राजनीतिक दल को छात्रसंघ या छात्रसंघ चुनाव अराजकता का द्योतक नजर आया। यूपी में एक बार फिर छात्रसंघ चुनाव अघोषित रुप से बैन हो चुका है। कई विश्वविद्यालयों में तो कई सालों से चुनाव ही नहीं हो सके। तमाम काॅलेज भी छात्रसंघ चुनावों को लेकर आंदोलित है।
‘पत्रिका’ ने ‘डिबेट इन काॅलेज’ कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रसंघ चुनाव के माध्यम से भविष्य तलाश रहे कुछ युवाओं से बातचीत की। पूछा कि जानना चाहा कि आखिर क्यों छात्रसंघ चुनाव जरूरी है। क्यों चुनाव होने चाहिए। क्या चाहते हैं ये छात्र।

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यूएनपीजी काॅलेज के छात्रसंघ उपाध्यक्ष रामलखन यादव ने कहा कि छात्रसंघों से काॅलेजों में एक आंतरिक लोकतंत्र की स्थापना होती है। छात्रसंघ काॅलेज प्रशासन की निरंकुशता पर अंकुश लगाने का भी काम करता है।
छात्र राजनीति में कदम रखने वाले अमन सिंह का मानना है कि छात्रसंघों के मजबूत होने से छात्रों के मुद्दों को बेहतर ढंग से उठाया जा सकता है। काॅलेज प्रशासन भी छात्रों की बातों को सुनता है, उनके निवारण के लिए प्रयास करता है।
छात्रनेता अंकुश जायसवाल का कहना है कि काॅलेज में आने वाला छात्र अपने प्रतिनिधि या छात्रनेता के माध्यम से अपनी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचवाता है। छात्रसंघ छात्रों की समस्याओं को आसानी से निपटवाते हैं।
छात्र विनोद कुमार साह के अनुसार तमाम छात्र ऐसे होते हैं जो अपनी बात सीधे जाकर काॅलेज के जिम्मेदारों को नहीं बता पाते। वे छात्रनेताओं के माध्यम से अपनी समस्याओं का निराकरण कराते हैं। चुनाव न होने से छात्रनेता भी निष्क्रिय हो जाते हैं इससे छात्रों को अपनी समस्याओं के निराकरण में दिक्कत आती है।
छात्र बलवंत कुमार का मानना है कि छात्र संघ चुनाव के नहीं होने से सबसे अधिक नुकसान छात्रों को ही होगा। फीस वृद्धि, तमाम तरह के अनावश्यक शुल्क वृद्धि आदि का भार आए दिन विवि या काॅलेज प्रशासन जब छात्रों पर लादता है तो एक मजबूत छात्रसंघ ही इसके लिए आगे आकर छात्रों की लड़ाई लड़ता है।

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