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क्रय केंद्र पर क्यों रिजेक्ट हो रहा है किसानों का धान, बता रहे हैं क्रय केंद्र प्रभारी
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क्रय केंद्र पर क्यों रिजेक्ट हो रहा है किसानों का धान, बता रहे हैं क्रय केंद्र प्रभारी

क्रय केंद्र प्रभारी शिवम शर्मा ने बताई खास बातें
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हरदोई

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Hariom Dwivedi

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Updated: 7 Nov 2020, 4:48 PM IST

हरदोई. जिले की संडीला तहसील के बेरुआ में बने धान क्रय केंद्र के प्रभारी शिवम शर्मा कहते हैं कि रजिस्ट्रेशन के बाद किसानों को अपने धान की बानगी और रजिस्ट्रेशन नंबर लेकर धान क्रय केंद्र पर आना होता हैं। यहां उनके धान की क्वालिटी जांची जाती है। मानकों के अनुरूप सही पाये जाने पर किसानों को टोकन नंबर दे दिया जाता है। वह बताते हैं कि ए ग्रेड के लिए धान में 67 फीसदी चावल होना चाहिए। अगर धान की टूटन 33 फीसदी तक होती है तो वह उसे ग्रेड में लेते हैं, लेकिन अगर 45 फीसदी तक है तो उसे बी ग्रेड में रखा जाता है। 45 फीसदी से कम अधिक टूटन पर धान नहीं लिया जाता है। इसके अलावा काला धान और अन्य विजातीय खामियां मिलने पर भी धान रिजेक्ट कर दिया जाता है।

धान पहले पक गया तो किसान का दोष?
– चावल की टूट 50 फीसदी हुई तो तो विक्रय केंद्रों पर नहीं होगी धान की खरीदी
– क्रय केंद्र प्रभारी ने बताया कि दिवाली से पहले धान का पकना टूट की मुख्य वजह
– धान में 67 फीसदी चावल होना चाहिए, टूटन 33 फीसदी है तो उसे बी ग्रेड में लेते हैं
– सरकार द्वारा तय धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1888 और 1868 रुपए है