नई दिल्ली: किसी ने सच कहा है जहां चाह होती है वहीं राह होती है, यह बात साबित कर दिखाया है फैमिना मिस इंडिया की फर्स्ट रनरअप उत्तर प्रदेश (UP) की मान्या सिंह (Manya Singh) ने मान्या सिंह (Manya Singh) भले इस प्रतियोगिता में फर्स्ट रनरअप रही हैं लेकिन उनका यह सफर करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देने वाला है। मान्या सिंह का मिस इंडिया के मंच तक का सफर आसान नहीं था। मान्या ने बेझिझक पूरी दुनिया को बताया कि कैसे एक रिक्शा चालक की बेटी मिस इंडिया के स्टेज तक पहुंचने में कामयाब रही है।
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मान्या सिंह के पिता एक साधारण हैसियत के रिक्शा चालक हैं। मान्या को इस मुकाम तक पहंचने के लिए जितना संघर्ष करना पड़ा है उसकी दास्तान सुन कर बड़े से बड़े हिम्मत वालों के भी पसीने छूट जांए। मान्या ने अपने सपने को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत की है। मान्या को कई रातें बिना खाए भी सोना पड़ा है लेकिन उनकी इक्छा शक्ति को कोई नहीं डिगा सका। मान्या ने अपने संघर्ष की कहानी को अपने इंस्टाग्राम पेज पर बताया है, मान्या कई दोपहर मीलों पैदल चली, घर परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमज़ोर होने की वजह से उन्हें स्कूल जाना भी नसीब नहीं हुआ। जिसकी वजह से उन्हें युवाअवस्था में पहुंचने से पहले ही घरकी ज़िम्मेदारी उठाने के लिए काम करना पड़ गया था।
मान्या ने इंस्टाग्राम पर बताया कि उनकी डिगरी के लिए उनके माता-पिता को अपने गहने तक गिरवी रखने पड़े थे। स्थिति इतनी दयनीय हो गई थी कि मान्या को अपने लिए खुद से सिले कपड़े भी पहनने की नौबत आई लेकिन ये सभी समस्याएं उनके राह में रोड़ा बनने की बजाय उन्हे हौसला देते गए। मान्या को अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए पैसों की सख्त ज़रूरत थी लिहाजा वे शाम को बर्तन साफ करतीं और रात की शिफ्ट में कॉल सेंटर में काम करती थीं। कई बार तो पास में पैसे नहीं होने के चलते उन्हें घंटों पैदल भी चलना पड़ा है।
इतने कठिन परिश्रम के बाद मान्या अपने मकसद के करीब पहुंचने में कामयाब हो पाईं हैं। इस सफलता का श्रेय वे अपने माता-पिता और भाई को देती हैं।