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14 साल बाद फिर जयपुर जिला प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

- जिला परिषद जयपुर के 25 सदस्यों ने जिला कलेक्टर को सौंपा प्रस्ताव

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जिला परिषद जयपुर में चार साल से जिला प्रमुख और सदस्यों की बीच खींचतान के बाद आखिरकार मंगलवार को सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। दोपहर 2 बजे बाद जिला कलेक्टर व जिला मजिस्ट्रेट जगरूप सिंह यादव को सदस्यों ने प्रस्ताव सौंपा। इसमें परिषद के सदस्य व भाजपा सरकार में मंत्री रहे कन्हैयालाल मीणा, उपजिला प्रमुख सहित लगभग 25 सदस्य मौजूद रहे। अब आगे जिला कलेक्टर प्रस्ताव की विधिक जांच कराने के बाद अग्रिम कार्यवाही करेंगे। इसमें प्रस्ताव के बाद मीटिंग बुलाई जाएगी, जिसमें बहस, चर्चा और मत विभाजन होगा।

– परिषद सदन में सदस्यों की स्थिति
जिला परिषद में 51 सदस्यों का सदन हैं। निर्वाचन के बाद भाजपा के 27, कांग्रेस के 22 और 2 निर्दलीय सदस्य सदन में आए। जिला प्रमुख पद निर्वाचन में भाजपा के मूलचंद मीणा 27 भाजपा सदस्यों और एक निर्दलीय के समर्थन से जीते। अब जिला प्रमुख के भाजपा से कांग्रेस में जाने पर भाजपा में 26 और कांग्रेस में 23 सदस्य हो गए हैं।

– प्रस्ताव पारित में 39 सदस्य वोट जरुरी
अब अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सदस्यों को पारित कराने के लिए 39 सदस्यों चाहिए। वहीं, जिला प्रमुख को बचने के लिए 13 वोट की आवश्यकता होगी। ऐसे में अब दोनों ही ओर से सदस्यों को अपनी तरफ खींचने के मशक्कत शुरू हो जाएगी। गौरतलब है कि प्रस्ताव देते समय भी 25 से अधिक सदस्य उपस्थित थे।

– कांग्रेस या निर्दलीय बनेगा जिला प्रमुख!
इस बोर्ड में जिला प्रमुख अनुसूचित जनजाति की सीट है। भाजपा से मूलचंद मीणा और कन्हैयालाल मीणा जीते थे। अब पूर्व मंत्री व सदस्य कन्हैयालाल मीणा ने दावेदारी से साफ मना कर दिया है। मूलचंद मीणा भाजपा से कांग्रेस में शामिल हो गए है। ऐसे में अब कांग्रेस के ही गोपाल लाल मीणा, रामजीलाल मीणा, हंसराज मीणा, सुमन मीणा और निदेलीय पुष्पा मीणा ही उम्मीदवार रहते हैं।

– परिषद इतिहास में दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में जिला प्रमुख मधु शर्मा के खिलाफ भी भाजपा के ही सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। तत्कालीन जिला कलेक्टर सुधांशु पंत ने बहस, चर्चा के लिए मीटिंग बुलाई थी। लेकिन कोरम पूरा नहीं होने पर प्रस्ताव खारिज हो गया था। गौरतलब है कि मधु शर्मा भी भाजपा बहुमत से निर्वाचित हुई थी। इसके बाद उन्होंने दल-बदल कर विधानसभा चुनाव लड़ा था।

– मान सम्मान का मुद्दा
‘हमारा उददेश्य सीट पर राजनीति करना नहीं है। सिर्फ वर्तमान जिला प्रमुख को हटाना है। इनकी कार्यशैली से दोनों ही पार्टियों के सदस्य परेशान हैं। आज तक इन्होंने किसी भी सदस्य को मान-सम्मान नहीं दिया। ग्रामीण विकास कार्य भी अटकाते रहे हैं। सदस्य दल सर्वसम्मति से जिस भी पार्टी के सदस्य को पद पर चुनेगा, स्वीकारीय हैं।

– मोहन लाल शर्मा, उपजिला प्रमुख

‘सदस्यों ने प्रस्ताव पेश किया है। इसकी विधिक जांच के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। नोटिस भी तभी जारी होगा।

– जगरूप सिंह यादव, जिला कलेक्टर जयपुर

 

 

 

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