जयपुर। बीसलपुर ( Bisalpur dam ) में अब एक माह का ही पानी बचा है। ऐसे में जयपुर , अजमेर, टोंक के लाखों लोगों की चिंता बढ़ गई है। मानसून ( monsoon ) की बेरुखी के बीच आपात स्थिति से निपटने के लिए कंटीजेंसी प्लान ( Consanguineous plan ) पर काम शुरू हो गया है। जयपुर शहर में 683 ट्यूबवैल और खोदने की तैयारी है।
दो दिन में एक बार पेयजल सप्लाइ पर भी मंथन तेज कर दिया गया है। यहां तक कि कई बड़े इलाकों तक दूसरे क्षेत्रों से पानी पहुंचाने पर काम शुरू हो गया है। इनमें झोटवाड़ा, जगतपुरा, मालवीय नगर, सिविल लाइन्स, चारदीवारी क्षेत्र शामिल हैं। यहां नए ट्यूबवैल नहीं खोदे जा सकते इसलिए इन इलाकों में दूसरे क्षेत्रों से पानी ट्रांसफर किया जाएगा।
ऐसे हालात के बीच जलदाय विभाग ( water department ) ने लोगों से पानी बचाने की अपील की है। उधर, जलदाय मंत्री ( Water minister ) बीडी कल्ला से लेकर प्रमुख शासन सचिव ने इस मामले में हर दिन की रिपोर्ट मांगी है। जिन इलाकों में ट्यूबवैल ( Tubewell ) में सरप्लस पानी आ रहा है, उन्हें प्रभावित इलाकों को जोड़ा जाएगा। जैसे, मालवीय नगर में भूजल की कमी है लेकिन दुर्गापुरा में स्थिति ठीक है तो दोनों इलाकों को जोड़ा जा रहा है।
यहां बीसलपुर लाइन से पहले दोनों इलाके पाइप लाइन से जुड़े हुए थे, जो पाइप लाइन अब भी है। इसी के जरिए पानी ट्रांसफर किया जाएगा। इसी तरह चारदीवारी क्षेत्र में लक्ष्मण डूंगरी व पानीपेच से पानी आएगा। पिछले वर्ष तक 2168 ट्यूबवैल ही संचालित थे, जिनसे 70 करोड़ लीटर पानी प्रतिदिन लिया जाता रहा। इस वर्ष जमीन से पेयजल खींचने का आंकड़ा 195 करोड़ लीटर हो गया। यानी 125 करोड़ लीटर ज्यादा पानी