जयपुर। दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय सैनिकों का जब भी जिक्र होता है, तो बीएसएफ के सैनिकों की शौर्य गाथाएं फिजाओं में गूंजने लगती है। आज बीएसएफ स्थापना दिवस है। अपने जज्बे को जज्बातों से आगे रखने वाले ऐसे ही वीर सपूतों की दास्तां पर पेश है एक खास रिपोर्ट—
शेरगढ़ के सोलंकियातला गांव में जन्मे भैरोसिंह राठौड़ बीएसएफ की 14 बटालियन में 1971 में जैसलमेर के लोंगेवाला पोस्ट पर तैनात थे। जहां पर भैरोसिंह ने अपने शौर्य व वीरता का परिचय देते हुए पाक सैनिकों के दांत खट्टे किए थे। लोंगेवाला पोस्ट पर मेजर कुलदीपसिंह की 120 सैनिकों की कंपनी के साथ तैनात रहकर उन्होंने डटकर सामना करते हुए पाक के टैंक ध्वस्त कर दुश्मनों को मार गिराया।
भैरोसिंह ने एमएफजी से 15-20 पाकिस्तानियों को ढेर कर दिया। भैरोसिंह मेजर कुलदीपसिंह के नेतृत्व में डटकर लड़े। राठौड़ का कहना है कि आजाद भारत के सैनिकों की दास्तां सभी को पता होनी चाहिए। सन 1997 में रिलीज बॉर्डर फिल्म में सुनील शेट्टी ने राठौड़ का रोल अदा किया था। फिल्म में भैरोसिंह को शहीद बताया गया था, हालांकि असल जिंदगी में फिल्म के रियल हीरो भैरोसिंह अपनी सरजमी सोलंकियातला में जिन्दगी बिता रहे हैं। आपको बता दें 1971 के युद्ध में उनके पराक्रम पर राठौड़ को तत्कालीन मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खान ने सेना मेडल से नवाजा था। सन 1963 में बीएसएफ में भर्ती होकर राठौड़ 1987 में रिटायर्ड हुए थे।
भैरोसिंह बताते हैं, ‘लोंगेवाला की लड़ाई जीते हुए करीब 48 साल बीत गए हैं। वहां एक ऐतिहासिक जीत मिली थी, पर आज की जेनरेशन इस बात से वाकिफ ही नहीं है कि लोंगेवाला है कहां? मैं चाहता हूं कि जिस तरह गुलाम भारत के वीरों की कहानी बच्चों को पता है, उसी तरह आजाद भारत के सैनिकों की दास्तां भी हर किसी को मालूम होनी चाहिए। यह दुनिया की पहली ऐसी जंग थी जो सिर्फ 13 दिन तक ही लड़ी गई। 16 दिसंबर 1971 के दिन पाकिस्तान ने अपने 92 हजार सैनिकों के साथ हिंदुस्तान के आगे सरेंडर किया था। इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।
वहीं सीकर के हिरणा निवासी विष्णु सिंह शेखावत बीएसएफ की 52वीं बटालियन में 1998 में भर्ती हुए थे। 5 मई 2003 को पिता बनने की सूचना का इंतजार कर रहे विष्णु की टुकड़ी अनंतनाग जिले के टीसद गांव के एक मकान में आतंकवादियों को घेरने पहुंच गई। यहां आतंकियों ने सेना पर गोलीबारी शुरू कर दी, आतंकियों की गोली से जख्मी होने के बाद भी उन्होंने फायरिंग जारी रखी। आतंकी तो मारे गए, लेकिन,विष्णु को वीरगति मिली। अंतिम संस्कार के अगले ही दिन वीरांगना ने पुत्र को जन्म दिया।
श्रीमाधोपुर के नाथूसर के लोकेन्द्र सिंह 2012 में महज 17 साल की उम्र में ही बीएसएफ में भर्ती हो गए थे। जुलाई 2018 में छत्तीसगढ़ के मोहला के जंगली इलाके में गश्त के दौरान घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने उनकी 175वीं बटालियन के जवानों पर हमला बोल दिया। जिसमें लोकेन्द्र और उनकी टीम ने करारा जवाब देते हुए दुश्मनों को आधे घंटे में ही भागने पर तो मजबूर कर दिया। लेकिन, दुश्मन की गोली लोकेन्द्र को शहीद के रूप में अमर कर गई।