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अश्वों में ग्लेंडर्स का बढ़ता खतरा, 4 जिले संक्रमित घोषित – संक्रमित क्षेत्र में 25 किलोमीटर की परिधि में पशुओं के आवागमन पर रोक

गोवंश में लम्पी के बाद अब ग्लेंडर्स रोग ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। घोड़ों में फैलने वाले इस रोग की चपेट में राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के चार जिले आ गए हैं जिन्हें पशुपालन विभाग ने संक्रमित घोषित कर दिया है साथ ही संक्रमित क्षेत्र के 25 किलोमीटर के एरिया में पशुओं को एकत्र करने के साथ ही उनके आवागमन पर भी रोक लगा दी गई है।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Mar 09, 2023

गोवंश में लम्पी के बाद अब ग्लेंडर्स रोग ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। घोड़ों में फैलने वाले इस रोग की चपेट में राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के चार जिले आ गए हैं जिन्हें पशुपालन विभाग ने संक्रमित घोषित कर दिया है साथ ही संक्रमित क्षेत्र के 25 किलोमीटर के एरिया में पशुओं को एकत्र करने के साथ ही उनके आवागमन पर भी रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही तिलवाड़ा में होने वाले श्री मल्लीनाथ पशुमेले में घोड़ों के प्रवेश के लिए एलिसा और सीएफटी जांच की रिपोर्ट का नेगेटिव होना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह जिले संक्रमित घोषित
जयपुर, झुंझुनू, अलवर और बीकानेर- इन जिलों में रोग प्रभावित क्षेत्रके 25 किलोमीटर की परिधि में अश्ववंशीय पशुओं को एकत्र करने और आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। साथ ही इसी माह बाड़मेर के तिलवाड़ा में शुरू हो वाले श्री मल्लीनाथ पशुमेले में एलिसा एवं सीएफटी परीक्षण में नेगेटिव जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी अनिवार्य रहेगी। नेगटिव जाँच रिपोर्ट के आभाव में अश्व वंशीय पशुओं को मेला क्षेत्र में किसी भी हालत में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। विभाग ने पशुपालकों से रोग की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए सहयोग करने की अपील की है।

 

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क्या है ग्लैंडर्स बीमारी ?
यह एक वायरस जनित जूनोटिक बीमारी है।
जिस अश्व को यह बीमारी होती है तो उसके नाक से तेज पानी बहने लगता है।
शरीर में फफोले हो जाते हैं।
सांस लेने में परेशानी होती है और बुखार आने लगता है।
एक जानवर से यह दूसरे जानवर में फैल सकती है साथ ही इंसानों में भी।
इस बीमारी का नहीं कोई इलाज
किसी घोड़े का ग्लैंडर्स वायरस का संदिग्ध माना जाता है तो उसके ब्लड की जांच करने के लिए राजस्थान में व्यवस्था नहीं है। इसके सैंपल हिसार स्थित अश्व अनुसंधान केंद्र भेजा जाता है। वहां दो चरणों में इसकी जांच की जाती है। यदि किसी अश्च की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उस अश्व को मारने के अतिरिक्त कोई दूसरा रास्ता नहीं होता। मालिक को केन्द्र सरकार मुआवजे के तौर पर 25 हजार रुपए दिए जाते हैं। उस इलाके के 5 किलोमीटर तक के एरिए में रहे जानवरों की भी जांच की जाती है और संक्रमित घोड़े की देखभाल करने वाले पालक की भी जांच की जाती है।
संक्रमण के कारण और बचने के उपाय
घोड़े में घाव, खरोच, कट लगा होने से 1 से 5 दिन में संक्रमण हो सकता है।
ऐसे अश्व से दूर रहा जाए।
ग्लैंडर्स का समय पर इलाज नहीं किया जाए तो 7 से 10 दिन में इससे अश्व की मौत हो सकती है।

900 से अधिक सैम्पल लिए
अभी तक पशुपालन विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों से इस रोग की जांच के लिए 900 से अधिक सैम्पल जांच के लिए भेजे हैं। जिसमें से 6 घोड़ों में ही ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि हुई है। जिसके बाद विभाग ने त्वरित कार्यवाही करते हुए रोग प्रकोपित घोड़ों को मानवीय तरीके से यूथनाइज कर वैज्ञानिक रीति की अनुपालना करते हुए निस्तारण किया गया है। इस रोग से प्रभावित अश्व वंशीय पशुओं के पशुपालकों को केंद्र सरकार की ओर से पूर्व में जारी निर्देशानुसार मुआवजा दिया जाएगा।

डॉ. रवि इसरानी, संयुक्त निदेशक
राज्य पशु रोग निदान केंद्र, जयपुर।