कवि, साहित्यकार और कालजयी कृति मधुशाला के महान रचनाकार डॉ.हरिवंशराय बच्चन की पुण्य स्मृति में सजी संगीत संध्या ‘आ रही रवि की सवारी ‘यादगार बन गई। फिल्मी गीतों की ढर्रेगत पेशकश से हटकर एकदम नई कंपोजिशंस का ताजा गुलदस्ता मानो रसिकों के लिए अनूठी,अनमोल सुरीली सौगात लेकर आया। कायस्थ समाज सेवा संस्थान और आर्ट बीट्स की ओर से यह आयोजन टोंक रोड पर नेहरू बालोद्यान के पास इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स ऑडिटोरियम में हुआ।कार्यक्रम में आकाशवाणी में कंपोजर दीपक माथुर के संगीत निर्देशन में कायस्थ कीर्ति पुरुष हरिवंशराय श्रीवास्तव बच्चन की चुनिंदा 10 सरस रचनाएं प्रस्तुत की गईं। गायक संजय रायजादा के गाए मधुशाला के एक बंद, पा जाएगा मधुशाला,,और गीत गिरजा से घंटे की टन टन से संगीत संध्या का आगाज हुआ। फिर, अंबिका मिश्रा ने कोरस के साथ तुम गा दो मेरा गान अमर हो जाए,डा. उमा विजय ने संध्या सिंदूर लुटाती है, सीमा मिश्रा ने दिन जल्दी जल्दी ढलता है, चेतना टंडन ने साथी सांझ लगी अब होने,, संजय रायजादा ने बीते दिन कब आने वाले और दीपक माथुर ने मुझसे चांद कहा करता है जैसी रचनाओं को अपने सुरों से साकार कर दिया। दीपक माथुर ने इन गीतों की संगीत रचना की। कीबोर्ड पर एस बबलू, गिटार पर पवन बालोदिया, तबले पर पावन डांगी, हारमोनियम पर शेर खाँ और ऑक्टोपेड पर विमलसन ने अपनी सधी हुई संगत से उनका साथ दिया। स्वर साधिका डॉ. उमा विजय ने बच्चनजी की रचनाओं के गहन अध्ययन के साथ सुरुचिपूर्ण संचालन किया।