किराए का ‘घर’ मिलें तो चले ‘आंगनबाड़ी केंद्र’
—कई केंद्र बंद करने की कगार पर
—केंद्र सरकार ने किराया तो बढ़ा दिया
—लेकिन ‘रेंट रिजनेबल सर्टिफिकेट’ बन रहा है रोड़ा
—मकान मालिकों को सार्वजनिक निर्माण विभाग से नहीं मिल रहा सर्टिफिकेट
—केंद्र सरकार की शर्त के अनुसार ये सर्टिफिकेट होगा तो ही मिलेगा बढ़ा हुआ किराया
जयपुर
टीना बैरागी शर्मा
ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र जो किराए के भवनों में चल रहे है इनके लिए केंद्र सरकार ने किराया बढ़ाया है लेकिन बढ़ा हुआ किराया लेने के लिए मकान मालिकों द्वारा ‘रेंट रिजनेबल सर्टिफिकेट’ विभाग को जमा नहीं कराया जा रहा है। इसके चलते मकान मालिकों को बड़ी हुई दर से भुगतान नहीं हो रहा है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्र चलाने के लिए भवन नहीं दिए जा रहे है जिसके चलते अब महिला एवं बाल विकास विभाग को केंद्र का संचालन करने में परेशानी हो रही है।
विभाग की मानें तो केंद्र सरकार ने आईसीडीएस मिशन मोड की गाइड लाइन जारी की है जिसमें किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के किराए में बढ़ोतरी की गई है। केंद्र के निर्देशानुसार प्रदेश के ऐसे सभी केंद्रों को बढ़ा हुआ किराया दिया जाना है लेकिन मकान मालिकों द्वारा रेंट रिजनेबल सर्टिफिकेट जमा नहीं कराया जा रहा है। इसकी वजह सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा समय पर ये सर्टिफिकेट नहीं देना बताई जा रही है। विभाग के चक्कर काटने से कतरा रहे मकान मालिकों ने आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए भवन देने से ही इंकार कर दिया है। साथ ही वे पुरानी दरों के साथ भी अब केंद्र संचालन के लिए जगह नहीं दे रहे है। इसके चलते कई केंद्रों को बंद करने की नौबत आ गई है। जबकि कुछ केंद्रों को नजदीक के ही स्कूलों में शिफ्ट किया गया है।
फैक्ट फाइल—
यदि प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों पर नजर डालें तो 63 हजार केंद्र चल रहे है। इनमें से 10 हजार आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे है जो किराए के भवनों में चल रहे है। इन केंद्रों के लिए ग्रामीण क्षेत्र में 200 रुपए से बढ़ाकर किराया 1000 हजार रुपए किया गया वहीं शहरी क्षेत्र में 750 से बढ़ाकर 4000 हजार रुपए किराया किया गया है।
विभाग ने जारी किए निर्देश—
आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति पर नजर रखने के लिए विभाग द्वारा गठित कमेटी की समय—समय पर बैठकें बुलाने के लिए परियोजना अधिकारियों को हाल ही में निर्देश दिए गए है। ये अधिकारी केंद्र के संचालन में आ रही दिक्कतों को दूर करने पर चर्चा करेंगे और रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजेंगे।