श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलपति डॉ. बलराज सिंह का कहना है कि जैव विविधता से सम्पन्न राजस्थान में फसल की उत्पादकता बढ़ाने के साथ उद्यानिकी,बीजीय मसाले और औषधीय फसलों के क्षेत्र में और अधिक रिसर्च की जरूरत है। दुर्गापुरा में भारतीय मृदा संधिपात कीट परियोजना के तहत शुरू हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र में चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में किसान की आय बढ़ोतरी के लिए नए रोड मैप के साथ रिसर्च की भी जरूरत है। कार्यशाला में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् नई दिल्ली के सहायक महानिदेशक डॉ. एसी दुबे ने कहा कि मृदा सुधार के लिए सूक्ष्मजीवियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही कीट प्रतिरोधी नए कीटों की पहचान करना जरूरी है। कार्यशाला में भारतीय मृदा संधिपात कीट परियोजना के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. ए एस बलोदा ने परियोजना की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यशाला को एनबीएआईआर बंगलुरू के निदेशक डॉ. एसएन सुशील और आरएआरआई नई दिल्ली के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. वी वी रामुमूर्ति ने की सम्बोधित किया। इस मौके पर अतिथियों ने कृषि साहित्य और बेस्ट रिसर्च सेंटर अवॉर्ड भी प्रदान किए।